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कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत! RGHS में 30 लाख तक की CAR-T सेल थेरेपी को मिली मंजूरी

राजस्थान RGHS में CAR-T सेल थेरेपी शामिल की गई है। पात्र कैंसर मरीजों को 30 लाख रुपये तक के पैकेज में आधुनिक उपचार की सुविधा मिलेगी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 21 Aug 2026 12:44:51

कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत! RGHS में 30 लाख तक की CAR-T सेल थेरेपी को मिली मंजूरी

राजस्थान में गंभीर रक्त कैंसर से जूझ रहे पात्र मरीजों के लिए राज्य सरकार ने अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में CAR-T सेल थेरेपी को अनुमत पैकेज में शामिल किया गया है। इस फैसले से योजना के पात्र लाभार्थियों को अत्याधुनिक और महंगे कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी। इस थेरेपी के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये तक का पैकेज स्वीकृत किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य RGHS से जुड़े कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था का लाभ पात्र पेंशनर्स और निर्धारित नियमों के तहत RGHS के माध्यम से चिकित्सा सुविधा लेने वाले लाभार्थियों को भी मिलेगा।

30 लाख रुपये तक का उपचार पैकेज

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के मुताबिक, CAR-T सेल थेरेपी के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये का पैकेज तय किया गया है। इसमें 26 लाख रुपये CAR-T सेल के निर्माण की लागत के लिए निर्धारित हैं, जबकि 4 लाख रुपये तक सपोर्टिव केयर और संभावित जटिलताओं के प्रबंधन के लिए रखे गए हैं।

सपोर्टिव केयर के तहत टोसिलीजुमेब, IVIG, अस्पताल में भर्ती और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 30 दिनों तक की दवाइयों को भी शामिल किया गया है। इससे पात्र मरीजों और उनके परिवारों पर इस महंगे उपचार का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

क्या है CAR-T सेल थेरेपी?

CAR-T सेल थेरेपी एक आधुनिक इम्यूनोथेरेपी है, जिसमें मरीज के रक्त से T-लिम्फोसाइट्स निकाले जाते हैं। इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सकें। आवश्यक गुणवत्ता जांच के बाद संशोधित कोशिकाओं को दोबारा मरीज के शरीर में पहुंचाया जाता है।

यह तकनीक मुख्य रूप से कुछ गंभीर रक्त कैंसर, जैसे ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा के मामलों में इस्तेमाल की जाती है। खासतौर पर उन मरीजों में इसका उपयोग किया जा सकता है जिनकी बीमारी सामान्य उपचार के बाद दोबारा सामने आई हो या उपचार के प्रति प्रतिरोधी हो।

हर मरीज के लिए नहीं होगी यह थेरेपी

CAR-T सेल थेरेपी को RGHS में शामिल किए जाने के बावजूद यह सुविधा हर कैंसर मरीज के लिए स्वतः उपलब्ध नहीं होगी। मरीज की पात्रता का आकलन विशेषज्ञ चिकित्सकों या विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा।

इसके लिए बीमारी का प्रकार, पहले किए गए उपचार, मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और तय चिकित्सा मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा। उपचार शुरू करने से पहले जरूरी जांच, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश और पूर्व-अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। थेरेपी अधिकृत केंद्रों पर प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी और जरूरी ICU बैकअप के साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएगी।

पेंशनर्स को भी मिलेगा फायदा

सरकार के इस निर्णय का दायरा केवल मौजूदा RGHS लाभार्थियों तक सीमित नहीं है। राजस्थान राज्य पेंशनर्स मेडिकल कन्सेशन स्कीम, 2021 के तहत चिकित्सा सुविधा पाने वाले पेंशनर्स भी इसका लाभ ले सकेंगे। इसके अलावा आरसीएस (एमए) रूल्स, 2013 के अनुसार RGHS के जरिए चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने वाले लाभार्थी भी इस व्यवस्था में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में है। उन्होंने RGHS को लगातार अधिक मजबूत, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित बनाने की बात कही है।

कैंसर उपचार के लिए पहले भी जारी हुई गाइडलाइन

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल के अनुसार, RGHS के तहत कैंसर उपचार को अधिक सुगम और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए हाल में गाइडलाइन भी जारी की गई थी। इसमें कैंसर उपचार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य चिकित्सा मानकों को आधार बनाया गया है और NICE यानी यूके के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस के मानकों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

महंगी दवाइयों की मंजूरी अब ऑनलाइन

कैंसर उपचार से जुड़ी महंगी दवाइयों के लिए मेडिकल बोर्ड की सिफारिश की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। अब मरीज या उनके परिजनों को मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के लिए RGHS कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी।

अस्पताल मरीज का प्रकरण RGHS पोर्टल के जरिए सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर को भेज सकता है। जयपुर से बाहर रहने वाले मरीजों को भी मेडिकल बोर्ड के लिए जयपुर आने की आवश्यकता नहीं होगी। ECOG फॉर्म सहित आवश्यक जानकारी के आधार पर वीडियो कॉल के माध्यम से मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

इसके अलावा कैंसर मरीजों की सुविधा के लिए पोर्टल पर अलग से रजिस्ट्रेशन विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। इससे उपचार की प्रक्रिया में अनावश्यक यात्रा, समय और खर्च को कम करने का प्रयास किया गया है।

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