जयपुर। राजस्थान की राजनीति में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच लंबे समय से जारी आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब एक नए और अधिक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक दोनों नेताओं के बीच विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर बयानबाजी और जुबानी हमले होते रहे थे, लेकिन इस बार मामला सीधे परिवार और करीबी रिश्तेदारों के कथित चयन तथा भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे दोनों नेताओं के बीच अब तक की सबसे बड़ी और सीधी भिड़ंत माना जा रहा है।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत पत्र लिखकर गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समधी रमेश चंद पूनिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। मंत्री ने आरोप लगाया है कि प्रभाव और राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हुए। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें आरपीएससी की मार्कशीट, सरकारी आदेश और अन्य अभिलेख शामिल बताए जा रहे हैं।
पत्र में डॉ. मीणा ने विशेष रूप से आरएएस भर्ती-2016 का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, गोविंद सिंह डोटासरा के पुत्र अविनाश डोटासरा को लिखित परीक्षा में 343 अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन इंटरव्यू में उन्हें 85 अंक दिए गए, जिससे उनका चयन सुनिश्चित हो गया। वहीं आरोप यह भी लगाया गया है कि मुख्य परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने वाली अभ्यर्थी गरिमा जिंदल को इंटरव्यू में केवल 25 अंक दिए गए, जिसके कारण उनका चयन नहीं हो सका। मीणा ने यह दावा भी किया है कि अविनाश डोटासरा का ओबीसी प्रमाण-पत्र कथित रूप से गलत शपथ पत्र के आधार पर तैयार कराया गया।
डॉ. मीणा ने अपने पत्र में डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया के परिवार से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमेश चंद पूनिया 40 वर्ष की आयु से पहले ही हेडमास्टर (राज्य सेवा) के पद पर नियुक्त हो चुके थे, जिसके चलते उनकी संतानें ओबीसी क्रीमीलेयर की श्रेणी में आती हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए था। इसके बावजूद प्रतिभा पूनिया, गौरव पूनिया और प्रभा पूनिया का आरएएस भर्ती प्रक्रियाओं में चयन हुआ। मीणा का आरोप है कि यह चयन नियमों की अनदेखी और कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर कराया गया।
अपने पत्र में कृषि मंत्री ने पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आरोपियों के कथित बयानों का भी हवाला दिया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में जेल में बंद आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और रामूराम रायका ने पुलिस पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया कि कुछ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अधिक अंक दिलाने के लिए उन पर दबाव बनाया गया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन इन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पत्र में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने कथित रूप से गलत दस्तावेजों या प्रभाव का उपयोग कर सरकारी सेवा प्राप्त की है और वर्षों से सरकारी वेतन व सुविधाओं का लाभ उठा रहा है, तो यह गंभीर प्रकृति का मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आरपीएससी या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी के माध्यम से पूरे मामले की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
कृषि मंत्री की इस मांग के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है। फिलहाल इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें मुख्यमंत्री कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। वहीं, इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भर्ती प्रक्रियाओं, आरक्षण नियमों और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।














