राजस्थान के जोधपुर में एक दर्दनाक हादसे में 9 साल के बच्चे की जान चली गई। बच्चा खेलते समय करीब 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उसे बाहर निकालने के लिए लगभग 39 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। शनिवार को बचाव दल ने बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस अभियान में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिविल डिफेंस और जिला प्रशासन की टीमें जुटी हुई थीं।
बच्चे के बोरवेल में गिरने की सूचना शुक्रवार दोपहर को मिली थी। घटना की जानकारी सामने आते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए गए। अभियान के दौरान टीमें लगातार काम करती रहीं। हालांकि, लंबी मशक्कत के बावजूद बच्चे की जान नहीं बच सकी।
खेलते-खेलते बोरवेल में गिरा बच्चा
डीएसपी भवानी सिंह ने बताया कि पुलिस को शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे सूचना मिली थी कि एक बच्चा बोरवेल में गिर गया है। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बच्चा पचाराम का बेटा था। पचाराम इस जमीन पर किसान के तौर पर काम करते हैं। भवानी सिंह के मुताबिक, पानी का पंप खराब हो गया था, जिसके कारण उसकी पाइपें हटा दी गई थीं। पचाराम और एक टेक्नीशियन पंप को ठीक करने में लगे हुए थे। इसी दौरान बच्चा खेलते-खेलते वहां आ गया और अचानक खुले बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बच्चे को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया गया।
डीएसपी ने बताया कि प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए थे। इसके बाद जोधपुर से SDRF की टीम और अजमेर से NDRF की टीम को बचाव कार्य के लिए तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सभी लोग बच्चे को बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।
1050 फीट गहरा था बोरवेल, 610 फीट पर फंसा बच्चा
NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट प्रवीण कुमार ने बचाव अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे अजमेर से रवाना हुई थी। टीम रात करीब 8 बजे घटनास्थल पर पहुंची और वहां पहुंचते ही बचाव कार्य में जुट गई। प्रवीण कुमार ने बताया, “कल दोपहर करीब 1 बजे, खेलते समय 9 साल का एक बच्चा बोरवेल में गिर गया। हम (NDRF की टीम) दोपहर करीब 2 बजे अजमेर से निकले और रात 8 बजे यहां पहुंच गए। पहुंचते ही हमने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया। हमारे पहुंचने से पहले ही SDRF, सिविल डिफेंस और जिला प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई थीं।” उन्होंने बताया कि बोरवेल की कुल गहराई लगभग 1050 फीट थी, जबकि बच्चा करीब 610 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था। इतनी गहराई में फंसे बच्चे तक पहुंचना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती थी। इसी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी रखा गया और अलग-अलग टीमें मिलकर बच्चे को बाहर निकालने में जुटी रहीं।
कैमरे की फुटेज में बेहोश नजर आया बच्चा
बचाव अभियान के दौरान बोरवेल के अंदर लगे कैमरे की मदद से बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट प्रवीण कुमार ने बताया कि कैमरे से मिली फुटेज में आखिरी बार देखे जाने पर बच्चा बेहोश दिखाई दे रहा था। उसमें कोई हलचल भी नजर नहीं आ रही थी। उन्होंने कहा, “कैमरे में जो दिखा, उसके अनुसार आखिरी बार देखे जाने पर बच्चा बेहोश लग रहा था और उसमें कोई हलचल नहीं दिखी। असल स्थिति के बारे में केवल कोई मेडिकल ऑफिसर ही बता सकता है।” प्रवीण कुमार के इस बयान में स्पष्ट किया गया कि कैमरे की फुटेज से बच्चे की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि नहीं की जा सकती थी। इसके लिए मेडिकल अधिकारी का आकलन जरूरी था। इस बीच बचाव दल ने अभियान बंद नहीं किया और बच्चे को बाहर निकालने की कोशिशें जारी रखीं।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन, फिर भी नहीं बची जान
बच्चे को बाहर निकालने के लिए शुक्रवार से शुरू हुआ बचाव अभियान पूरी रात जारी रहा और शनिवार तक चलता रहा। NDRF और SDRF के साथ सिविल डिफेंस तथा जिला प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर काम कर रही थीं। करीब 39 घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे को आखिरकार बोरवेल से बाहर निकाला गया। बच्चे को बाहर निकालने के तुरंत बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इतने लंबे समय तक चले बचाव अभियान का अंत बच्चे की मौत की खबर के साथ हुआ। बोरवेल में गिरने की घटना से लेकर बच्चे को बाहर निकालने तक बचाव दल के सदस्य लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।














