
अजमेर में नशे का कारोबार करने वालों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नया तरीका अपना लिया था। अब वे सीधे सप्लाई करने के बजाय कोरियर सर्विस को ढाल बनाकर गांजे की डिलीवरी कराने की जुगत में थे। लेकिन क्लॉक टावर थाना पुलिस की सतर्क निगरानी इस नए सिस्टम को ज्यादा आगे बढ़ने नहीं दे सकी। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि केसरगंज इलाके की एक प्रतिष्ठित कोरियर कंपनी के माध्यम से नशे की बड़ी खेप भेजने की तैयारी चल रही है।
टैक्सी वैन पकड़ी गई, तीन लोग हिरासत में
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। जांच में पता चला कि अजमेर टैक्सी नंबर वाली एक इको वैन इस संदिग्ध पार्सल को किसी अन्य शहर तक पहुंचाने के लिए तैयार खड़ी थी। पुलिस ने मौके पर वैन को रोककर कब्जे में ले लिया।
इसी दौरान पार्सल लेने पहुंचे तीन व्यक्तियों—महेंद्र कच्छावा, सुरेंद्र सिंह, सलीम चीता और सलीम लंगड़ा—को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस को शक है कि ये सभी एक बड़े नशा तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं और लंबे समय से इस काम में सक्रिय हो सकते हैं।
कोरियर कंपनी में पैकेट किस नाम और किस तरह बुक कराया गया, इस संबंध में कंपनी के कर्मचारियों से भी पूछताछ जारी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन मास्टरमाइंड है।
पुलिस जुटी नेटवर्क की तह तक पहुंचने में
क्लॉक टावर थाना पुलिस अब पूरे गिरोह की परतें खोलने में लगी है। अधिकारियों का कहना है कि तस्करों द्वारा काम करने के तरीके में लगातार बदलाव इस बात का संकेत है कि पुलिस की पारंपरिक जांच प्रणाली अब उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। इसी वजह से वे नए और आधुनिक माध्यमों का सहारा ले रहे हैं ताकि आसानी से पकड़े न जा सकें।
शहर में नशे के खिलाफ सख्ती जारी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी तरह की संलिप्तता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने न सिर्फ तस्करों की नई तरकीब का पर्दाफाश किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि पुलिस हर स्तर पर सतर्क है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नकेल कसी जा सकती है।














