
दिल्ली में आयोजित कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक में राजस्थान कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी। SIR से जुड़े मामलों पर चर्चा के बीच करीब दो घंटे चली इस बैठक में तीन बार राजस्थान का उदाहरण दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस ने जमीन से जुड़ा संगठित नेटवर्क तैयार किया है, जिसका परिणाम आने वाले चुनावों में स्पष्ट दिखाई देगा। उनके मुताबिक, पार्टी वहां केवल चुनाव जीतने की रणनीति नहीं बना रही, बल्कि एक टिकाऊ और सक्रिय संगठनात्मक ढांचा खड़ा कर रही है। यह मॉडल आगे अन्य राज्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
राजस्थान में 52 हजार बूथ एजेंट तैनात
बैठक के दौरान एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि प्रदेश में 52,000 से अधिक बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की तुलना में यह कांग्रेस का सबसे बड़ा और व्यापक संगठनात्मक ढांचा है। वेणुगोपाल ने इसे उत्कृष्ट उपलब्धि बताते हुए राजस्थान कांग्रेस की टीम के प्रयासों की सराहना की।
ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक संगठन सक्रिय
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी चर्चा हुई कि राजस्थान में बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर 13,000 से अधिक डिजिटल संचार समूह सक्रिय किए गए हैं। इसके साथ ही हर विधानसभा क्षेत्र में संगठन निरीक्षक तैनात कर फीडबैक तंत्र को मज़बूत बनाया गया है।
पिछले एक वर्ष में जिला स्तरीय यात्राओं, ब्लॉक सम्मेलनों, डेटा-आधारित रणनीति और सोशल मीडिया वॉर रूम द्वारा बूथ एजेंटों के सीधे संपर्क जैसे प्रयासों ने संगठन में नई ऊर्जा भरी है।
राजस्थान के कार्यकर्ताओं को मिल सकती है राष्ट्रीय जिम्मेदारी
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि राजस्थान कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि जब बूथ स्तर पर संगठन मजबूत होता है, तब राजनीतिक परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव का प्रभाव न्यूनतम रह जाता है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले समय में राजस्थान के कई सक्रिय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को राष्ट्रीय भूमिकाएँ भी सौंपी जा सकती हैं।
राजस्थान कांग्रेस बनेगी राष्ट्रीय मॉडल
बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि राजस्थान कांग्रेस अब संगठनात्मक मजबूती के एक प्रभावी राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रही है। हाईकमान का मानना है कि यहां अपनाई गई कार्यशैली और रणनीति को अन्य राज्यों में लागू कर कांग्रेस अपना संगठनात्मक ढांचा और मजबूत कर सकती है।














