महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के एनडीए में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। इन अटकलों के बीच पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और भाजपा के राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े के बीच कोई राजनीतिक समझौता होने वाला है, जिसके तहत शरद पवार की पार्टी केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा नीत गठबंधन को समर्थन दे सकती है।
पत्रकारों से बातचीत में सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्हें जयंत पाटिल और विनोद तावड़े के बीच किसी भी तरह की ऐसी मुलाकात या बातचीत की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरों की जानकारी उन्हें भी मीडिया के जरिए ही मिली है। सुले ने यह भी बताया कि विनोद तावड़े से उनकी मुलाकातें होती रहती हैं, लेकिन वह पूरी तरह संसदीय कार्यों से जुड़ी होती हैं।
'12 साल से ऐसी बातें सुन रही हूं'
जब सुप्रिया सुले से पूछा गया कि क्या शरद पवार की पार्टी एनडीए को समर्थन देने या उसमें शामिल होने की तैयारी कर रही है, तो उन्होंने इसे केवल अटकल बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों से वह इस तरह की चर्चाएं लगातार सुनती आ रही हैं। उनके मुताबिक, जयंत पाटिल और विनोद तावड़े के बीच किसी बैठक की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि वह और विनोद तावड़े संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य हैं, इसलिए संसदीय कार्यों के दौरान दोनों की अक्सर मुलाकात होती रहती है। सुले ने बताया कि बीते एक महीने में ही उनकी तावड़े से करीब 21 बार मुलाकात हुई होगी। ऐसे में इन मुलाकातों को राजनीतिक जोड़-तोड़ से जोड़ना उचित नहीं है और इस तरह की चर्चाओं पर उन्हें केवल हंसी आती है।
रोहित पवार ने भी किया दावों का खंडन
एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने भी पार्टी के भाजपा के साथ किसी तरह की बातचीत से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी विपक्ष की भूमिका में पूरी मजबूती के साथ जनता, किसानों, छात्रों और मजदूरों के मुद्दे उठाती रहेगी। उनके अनुसार, भाजपा के साथ गठबंधन या समर्थन को लेकर किसी भी स्तर पर कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है।
हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने इन खबरों को लेकर अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गलियारों में इस तरह की बातचीत होने की चर्चा जरूर है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब फैसला शरद पवार और उनकी पार्टी को करना है कि वे विचारधारा को प्राथमिकता देंगे या सत्ता को। वडेट्टीवार ने कहा कि यह तय करना होगा कि उनका लक्ष्य प्रगतिशील महाराष्ट्र के निर्माण के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहब आंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के विचारों पर आगे बढ़ना है या फिर केवल राजनीतिक शक्ति हासिल करना।
सूत्रों ने बैठक और संभावित फॉर्मूले का किया दावा
इस बीच, सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि शुक्रवार को एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने भाजपा सांसद विनोद तावड़े से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में इस संभावना पर चर्चा हुई कि यदि शरद पवार की पार्टी भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनती है, तो उसे राजनीतिक रूप से क्या लाभ मिल सकते हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि शरद पवार की पार्टी के सामने दो विकल्पों पर चर्चा हुई—पहला, औपचारिक रूप से एनडीए में शामिल होना और दूसरा, गठबंधन में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देना। चर्चा में सरकार में भागीदारी और संभावित मंत्रालयों को लेकर भी विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर की जा रही है।
कैबिनेट पदों को लेकर भी सामने आई अटकलें
सूत्रों के मुताबिक, यदि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) एनडीए में शामिल होती है, तो उसे केंद्र सरकार में एक कैबिनेट मंत्री पद और महाराष्ट्र सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री पद मिल सकते हैं। इनमें राज्य का वित्त मंत्रालय भी शामिल होने की चर्चा है, जो फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार पहले ही वित्त विभाग पर अपना दावा जता चुकी हैं। वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि यदि शरद पवार गुट एनडीए में शामिल होता है तो यह विभाग जयंत पाटिल को दिया जा सकता है। हालांकि, इन सभी संभावनाओं और दावों पर अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।













