महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में बीजेपी और शिवसेना साथ हैं, लेकिन सहकारिता क्षेत्र के एक अहम चुनाव में दोनों दलों के बीच मुकाबले के आसार बन गए हैं। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (MDCCB) के चुनाव में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना उतरने की तैयारी कर रही है। इससे बैंक पर लंबे समय से प्रभाव रखने वाली बीजेपी के सामने सीधी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
शिंदे गुट की यह तैयारी ठाणे-पालघर जिला बैंक चुनाव में मिली सफलता के बाद सामने आई है। पार्टी अब मुंबई के इस प्रभावशाली सहकारी बैंक में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बना रही है। इसके लिए सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में चुनावी रणनीति तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैंक पर बीजेपी का दबदबा
मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के बोर्ड में कुल 20 निदेशक हैं। फिलहाल बैंक पर बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर और उनके समर्थकों का नियंत्रण बताया जाता है। बोर्ड में बीजेपी के प्रसाद लाड और तेजस्वी घोसालकर जैसे नेता भी शामिल हैं।
इसके अलावा ठाकरे गुट के विधायक सुनील राउत भी बैंक के बोर्ड का हिस्सा हैं। ऐसे राजनीतिक समीकरणों के बीच शिंदे सेना का चुनावी मैदान में उतरना बीजेपी के मौजूदा प्रभाव के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
क्यों अहम है मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक?
सहकारी बैंक का चुनाव महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की कार्यशील पूंजी करीब 10,282 करोड़ रुपये बताई गई है। बैंक हर साल लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये के होम लोन वितरित करता है।
बैंक सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से जुड़े कामों के अलावा हाउसिंग सोसायटियों के सेल्फ-रीडेवलपमेंट के लिए भी फंडिंग करता है। यही वजह है कि बैंक पर नियंत्रण को सहकारिता क्षेत्र के साथ-साथ जमीनी राजनीतिक पहुंच से भी जोड़कर देखा जाता है।
स्थानीय चुनावों से पहले बढ़ सकती है खींचतान
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना फिलहाल सरकार में साझेदार हैं। इसके बावजूद सहकारिता क्षेत्र में दोनों दलों के बीच अलग-अलग राजनीतिक दावेदारी सामने आ रही है। आगामी बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मुंबई बैंक का चुनाव इस प्रतिस्पर्धा को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
शिंदे गुट की कोशिश अब मुंबई के सहकारी बैंक में अपनी स्थिति मजबूत करने की है, जबकि बैंक पर मौजूदा प्रभाव बीजेपी के पास है। ऐसे में चुनाव में दोनों सहयोगी दलों के आमने-सामने आने की स्थिति बन सकती है।













