मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहा था। कार्रवाई के दौरान तीन फर्जी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मुंबई पुलिस की ऐसी यूनिट के नाम पर पहचान पत्र तैयार कर रखे थे, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है। नकली आईडी कार्ड, पुलिस की वर्दी और सरकारी रौब का इस्तेमाल कर ये लोग लोगों को अपने झांसे में लेते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
डीसीपी (डिटेक्शन) राज तिलक रौशन के अनुसार, आरोपी पूरी तैयारी के साथ पुलिस अधिकारी का रूप धारण करते थे। इनके पास पुलिस का स्टिकर लगी एक वैन, पुलिस की वर्दी, डंडा और नकली रिवॉल्वर भी बरामद हुई है। इन सामानों की मदद से वे लोगों को आसानी से विश्वास में लेकर खुद को असली पुलिसकर्मी साबित करने की कोशिश करते थे।
नकली दस्तावेजों के सहारे लोगों से करते थे ठगी
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी फर्जी सरकारी पहचान पत्र और पुलिस अधिकारी होने का दावा कर लोगों को बैंक से लोन मंजूर कराने का झांसा देते थे। इसके बदले वे प्रोसेसिंग, फाइलिंग या अन्य बहानों से लोगों से पैसे ऐंठ लेते थे। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से नकली पुलिस पहचान पत्र, जाली सरकारी दस्तावेज और कई अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।
इस पूरे मामले में मुंबई के सहार पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनके साथ कोई अन्य सहयोगी भी जुड़ा हुआ है या नहीं।
एक आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से एक का आपराधिक इतिहास पहले से रहा है। उसके खिलाफ मुंबई के कस्तूरबा मार्ग, साकीनाका और खेरवाड़ी पुलिस थानों में धोखाधड़ी और जालसाजी के कई मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है।
यह पूरी कार्रवाई मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-1 ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर इस फर्जी नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में लगी हुई है।
गुजरात में भी सामने आया था ऐसा ही मामला
इस तरह के फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। 24 मई को गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो खुद को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बताकर लोगों को ठग रहा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सायला निवासी 31 वर्षीय सोहिलखान पठान के रूप में हुई थी। राजकोट रेंज पुलिस की जांच में सामने आया था कि उसने साइबर अपराध के जरिए आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र और मॉर्फ की गई तस्वीरें तैयार की थीं। इन दस्तावेजों को वह सोशल मीडिया के माध्यम से साझा कर खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में पेश करता था।
दिल्ली में भी फर्जी पुलिस बनकर की थी करोड़ों की ठगी
ऐसा ही एक मामला 11 मई को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा इलाके से तीन फर्जी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था।
पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों ने पुलिस अधिकारी बनकर राजस्थान के एक व्यक्ति से करीब 50 लाख रुपये की ठगी की थी। कार्रवाई के दौरान उनके पास से 33.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए थे। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने लोगों को सतर्क रहने की जरूरत एक बार फिर याद दिलाई है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के पुलिस अधिकारी होने के दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पूरी तरह जांच अवश्य करें।














