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क्या पिनराई विजयन ने पहले ही स्वीकार कर ली हार? सोशल मीडिया प्रोफाइल बदलाव से बढ़ी सियासी हलचल, मुख्यमंत्री टैग हटते ही मचा हड़कंप

केरल चुनाव परिणाम से पहले पिनराई विजयन के सोशल मीडिया प्रोफाइल बदलाव ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री टैग हटने के बाद हार के कयासों ने जोर पकड़ लिया है और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 04 May 2026 10:43:31

क्या पिनराई विजयन ने पहले ही स्वीकार कर ली हार? सोशल मीडिया प्रोफाइल बदलाव से बढ़ी सियासी हलचल, मुख्यमंत्री टैग हटते ही मचा हड़कंप

केरल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के सोशल मीडिया प्रोफाइल में किए गए एक छोटे से बदलाव ने बड़े राजनीतिक अर्थ निकालने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को होने वाली मतगणना से पहले उन्होंने अपने आधिकारिक परिचय से “मुख्यमंत्री” शब्द हटा दिया, जिसके बाद अब उनके बायो में केवल माकपा (CPI-M) के पोलित ब्यूरो सदस्य का उल्लेख दिखाई दे रहा है। इस बदलाव के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अटकलों का दौर तेज हो गया है कि क्या वाम मोर्चे की स्थिति कमजोर हो चुकी है।

विजयन के फैसले पर अलग-अलग दावे

इस कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में दो तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष का कहना है कि एग्जिट पोल्स में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) को बढ़त मिलने के संकेतों के बीच यह कदम संभावित हार की स्वीकारोक्ति जैसा प्रतीत होता है। वहीं दूसरी ओर समर्थकों का दावा है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां कार्यकाल समाप्त होने के बाद पदनाम हटाना एक सामान्य और संवैधानिक व्यवहार है। हालांकि, जिस समय यह बदलाव किया गया, उसने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

धर्माडम सीट पर मुकाबला बना दिलचस्प

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन इस बार अपनी परंपरागत सीट धर्माडम से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां इस बार का मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है। 2021 में उन्होंने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार हालात काफी अलग नजर आ रहे हैं। यूडीएफ के वीपी अब्दुल रशीद और भाजपा के के रंजीत के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिससे विजयन की चुनौती बढ़ गई है। इस बीच 9 अप्रैल को दर्ज 78.27 प्रतिशत मतदान को सत्ता-विरोधी माहौल का संकेत भी माना जा रहा है।

वामपंथी सरकार के लिए बड़ा इम्तिहान

2021 में शानदार प्रदर्शन के साथ सत्ता में आई एलडीएफ सरकार के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। यदि रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो केरल में लंबे समय से चली आ रही सत्ता परिवर्तन की परंपरा एक बार फिर लौट सकती है। साथ ही यह परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी राजनीति के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि केरल वर्तमान में उसका सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। अब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि विजयन का सोशल मीडिया बदलाव सिर्फ एक औपचारिकता थी या फिर सत्ता परिवर्तन का संकेत। इसके अलावा तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम भी दक्षिण भारत की राजनीतिक दिशा को नई धार दे सकते हैं।

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