दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने स्वास्थ्य विभाग में सामने आए कथित करोड़ों रुपये के खरीद घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को की गई इस कार्रवाई के दौरान ACB ने डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को भी हिरासत में लिया। इससे पहले इसी मामले में गिरफ्तार किए गए डॉ. विनोद कुमार रंगा से पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में मिले अहम सुरागों के आधार पर इन दोनों की गिरफ्तारी की गई।
खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप
यह पूरा मामला दवाइयों, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के अधीन कार्यरत सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के माध्यम से कई सौ करोड़ रुपये की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई। ACB फिलहाल खरीद प्रक्रिया, वित्तीय लेन-देन और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर पहुंचाया गया फायदा
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट और लिनेन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS), विभिन्न दवाइयों और सर्जिकल सामग्री की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया। आरोप है कि कुछ चुनिंदा सप्लायरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा की शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि अन्य योग्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएं। इसके परिणामस्वरूप सरकारी विभाग ने जरूरत से कहीं अधिक कीमत पर सामान खरीदा और सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस
मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी करप्शन ब्रांच ने शिकायत मिलने के बाद 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद से लगातार जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और इस कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।
पहले हटाया गया पद से, फिर किया गया निलंबित
डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तारी से पहले 21 मई को DGHS के पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में रखा गया था। इसके बाद उनका तबादला गुरु तेग बहादुर अस्पताल में कर दिया गया। बाद में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।
आंतरिक जांच में भी सामने आईं गंभीर खामियां
इस पूरे मामले की विभागीय जांच के दौरान दवाइयों की खरीद, उनके भंडारण और वितरण व्यवस्था में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच फार्मासिस्टों और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के दो अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है तथा दोषियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी।













