दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन बुलाया था। पार्टी का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उसके प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लेने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी। CJP ने इस कार्रवाई को ‘अगवा’ किए जाने का मामला बताते हुए दिल्ली में आपातकाल जैसे हालात होने का आरोप लगाया। पार्टी के मुताबिक, मुंबई से दिल्ली पहुंचे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को विमान के भीतर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। CJP ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि इस कार्रवाई के करीब 10 घंटे बाद भी उसे तीनों नेताओं के बारे में जानकारी नहीं मिली थी और उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। पार्टी ने सवाल उठाया कि पुलिस ने नेताओं को कहां रखा है और इस तरह हिरासत में लेने की कार्रवाई को किस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है।
CJP ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि उसके नेताओं को हिरासत में लिए जाने के कई घंटे बाद भी उनका पता नहीं चल पाया है। पार्टी ने इसे आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को अगवा कर लिया है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP की कमान अजिंक्य शिंदे को सौंपे जाने की बात सामने आई। शिंदे ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे जंतर-मंतर की ओर बढ़ना जारी रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की एकजुटता से डर गई है और इसी वजह से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों को रोका जा रहा है। शिंदे ने पिछले प्रदर्शन का जिक्र करते हुए दावा किया कि जब पहले देशभर से लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे, तब आंदोलन ने सरकार के अहंकार को चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए ट्रेन, बस और मेट्रो जैसी परिवहन सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं। शिंदे के मुताबिक, यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार आंदोलन को लेकर चिंतित है। CJP नेता ने दोहराया कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगना है। पार्टी उन पर वोट चोरी के आरोप लगाती रही है। शिंदे ने लोगों से अपील की कि वे जहां भी हों, दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर कूच करें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस उन्हें रास्ते में रोकती है, तो वे उसी स्थान पर प्रदर्शन शुरू कर दें।
सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। समाचार सामग्री के अनुसार, CJP नेता अभिजीत दीपके, चार पूर्व मुख्यमंत्री और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के लिए निर्धारित जंतर-मंतर पर पूरे दिन सन्नाटा नजर आया। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए लुटियन दिल्ली में 30 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इलाके में कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। इन इंतजामों के बीच बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर के आसपास नहीं पहुंच सके। CJP का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के कारण उसके नेतृत्व और समर्थकों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया। दूसरी ओर, उपलब्ध सामग्री में दिल्ली पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति, उनके ठिकाने या कार्रवाई के आधार पर कोई विस्तृत पक्ष नहीं दिया गया है।
राहुल गांधी ने युवाओं से आंदोलन जारी रखने को कहा
प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि शासन और संविधान पर हमला करने वाले लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़े। विपक्ष के कुछ नेताओं ने दिल्ली में हुई कार्रवाई की तुलना आपातकाल से भी बदतर हालात से की। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित विपक्ष के कई नेताओं को भी राजधानी में अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। ये नेता CJP की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। इस घटनाक्रम ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को केंद्र में ला दिया है। CJP ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने और उनसे संपर्क नहीं हो पाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि विपक्षी नेताओं ने भी आंदोलन जारी रखने की बात कही है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों और हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति पर आधिकारिक पक्ष उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।














