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आंदोलन हाईजैक होने के सवाल पर बोले विजेता दहिया, CJP से हटाए जाने के बाद रखी पूरी बात

CJP से हटाए गए पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने बर्गर विवाद, प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी, NEET आंदोलन के राजनीतिकरण और पार्टी से हटाए जाने पर पहली बार खुलकर सफाई दी। जानें उन्होंने क्या-क्या कहा।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 23 Jul 2026 11:24:30

आंदोलन हाईजैक होने के सवाल पर बोले विजेता दहिया, CJP से हटाए जाने के बाद रखी पूरी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता विजेता दहिया ने पार्टी से हटाए जाने के बाद पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान, जंतर-मंतर पर NEET आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई, बर्गर विवाद और आंदोलन के राजनीतिकरण जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। दहिया का कहना है कि उनके खिलाफ उठे विवादों को वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उछाला गया।

गौरतलब है कि मंगलवार को CJP ने विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटाने की घोषणा की थी। पार्टी ने यह फैसला उस वीडियो के वायरल होने के बाद लिया, जिसमें वह 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण माहौल के बीच एक फास्ट फूड आउटलेट में बर्गर खाते दिखाई दिए थे। CJP ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि दहिया का व्यवहार आंदोलन की भावना और उसके मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।

पार्टी से हटाए जाने पर क्या बोले विजेता दहिया?

एक समाचार चैनल से बातचीत में जब विजेता दहिया से पूछा गया कि उन्हें पार्टी से क्यों हटाया गया, तो उन्होंने कहा कि उनकी एक टिप्पणी के बाद "कुछ मनुवादी आतंकी" लगातार उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विवाद की शुरुआत प्रेमानंद महाराज को लेकर दिए गए उनके बयान से हुई।

दहिया ने कहा कि प्रेमानंद महाराज ने कथित तौर पर आसाराम को अपना "राम" और "ठाकुर" बताया था, जबकि आसाराम एक दोषसिद्ध व्यक्ति हैं। उनके अनुसार, यही बात उन्हें स्वीकार नहीं हुई और उन्होंने अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को प्राप्त है और उसी अधिकार के तहत उन्होंने अपनी बात कही थी।

बर्गर विवाद पर भी दी सफाई

वायरल वीडियो को लेकर उठे विवाद पर विजेता दहिया ने कहा कि उनके एक क्षण को दिखाकर पूरे आंदोलन में उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आलोचना करने वालों को भारतीय जनता पार्टी के समर्थक बताते हुए कहा कि पिछले करीब 50 दिनों से वह लगातार आंदोलन के लिए काम कर रहे थे।

दहिया के अनुसार, वह प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक प्रदर्शन स्थल पर सक्रिय रहते थे, मीडिया से बातचीत करते थे और आंदोलन को लेकर फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार का जवाब दे रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की आशंका के चलते वह लगातार दो रातों तक सो नहीं पाए थे और प्रदर्शन स्थल पर निगरानी में लगे हुए थे। उनके मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने के बाद उन्होंने केवल खाना खाया था, जिसे अनावश्यक विवाद का विषय बना दिया गया।

आंदोलन के राजनीतिकरण पर क्या कहा?

आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए उस आरोप पर भी विजेता दहिया ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस NEET आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। दहिया ने कहा कि CJP का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि छात्रों को न्याय दिलाना है।

उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक विवाद के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि लाखों युवा मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक दल आंदोलन का समर्थन करना चाहता है तो इससे उन्हें आपत्ति नहीं है, बशर्ते छात्रों की मांगों को गंभीरता से उठाया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी इस आंदोलन के जरिए छात्रों के हित में आवाज उठाना चाहता है, उसका स्वागत है।

राजनीतिक दलों की भूमिका पर बोलते हुए दहिया ने कहा कि विपक्ष का काम राजनीति करना ही होता है। उन्होंने बताया कि आंदोलन स्थल पर चंद्रशेखर आजाद, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और तृणमूल कांग्रेस सहित कई दलों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। उनके अनुसार, यदि कोई राजनीतिक दल इस आंदोलन का समर्थन करता है और छात्रों को न्याय दिलाने में मदद करता है, तो उसे इसका श्रेय लेने में भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

"दो रातों से नहीं सोया था"

विजेता दहिया ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर उनके पूरे योगदान का आकलन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग यह नहीं देख रहे कि वह भी आंदोलनकारियों की तरह लगातार दो रातों से जाग रहे थे और हर समय प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, जैसे आंदोलन की सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर हो। दहिया का कहना था कि वह लगातार छात्रों के साथ खड़े रहे और अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाते रहे, लेकिन एक वीडियो के आधार पर उनकी पूरी छवि बदलने की कोशिश की गई।

CJP ने क्यों लिया कार्रवाई का फैसला?

दूसरी ओर, CJP ने विजेता दहिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को उचित बताते हुए कहा कि उनके व्यवहार ने आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचाया। पार्टी ने अपने बयान में उनके कथित "बेहद असंवेदनशील आचरण" की कड़ी आलोचना की थी।

CJP ने कहा कि जिस समय शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उसी समय दहिया का बर्गर खाते हुए वीडियो सामने आया। पार्टी के अनुसार, यह व्यवहार आंदोलन की विचारधारा और उसके मूल मूल्यों के विपरीत था। इसी कारण उन्हें प्रवक्ता पद से हटाते हुए सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें विजेता दहिया जंतर-मंतर के पास स्थित एक फास्ट फूड आउटलेट में दिखाई दिए। उसी दौरान पुलिस संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग कर रही थी। वीडियो में एक व्यक्ति दहिया से यह सवाल पूछता भी नजर आया कि जब प्रदर्शनकारी सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तब वह रेस्तरां में क्यों मौजूद हैं।

इसके बाद विवाद और बढ़ गया। आलोचनाओं के जवाब में विजेता दहिया ने स्वयं भी बर्गर खाते हुए एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि भूख लगने पर खाना खाना कोई अपराध नहीं है। उनके अनुसार, वह लंबे समय से बिना आराम किए आंदोलन में जुटे हुए थे और सिर्फ भोजन करने को लेकर उन्हें निशाना बनाया गया।

दहिया ने दोहराया कि लोगों ने उनके कई दिनों के संघर्ष को अनदेखा कर केवल कुछ सेकंड के वीडियो के आधार पर राय बना ली। उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद उस समय सामने आया, जब CJP का 'चलो संसद' मार्च पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ था। यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।

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