छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने चार महीनों के भीतर आठ लोगों की कथित हत्या करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान 46 वर्षीय किराना दुकानदार रामसहाय जायसवाल के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने खर्वे गांव में फरवरी से मई के बीच कई लोगों को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया। मामले के खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों में लंबे समय से बनी हुई दहशत अब सामने आने लगी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कसडोल थाना क्षेत्र के खर्वे गांव में इस साल फरवरी से लेकर 14 मई तक लगातार कई लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआत में इन मौतों को सामान्य माना गया, लेकिन जब मृतकों की संख्या बढ़ती गई तो गांव वालों को शक होने लगा कि इन घटनाओं के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।
ग्रामीणों के संदेह ने खोला पूरे मामले का राज
पुलिस ने बताया कि 6 जून को खर्वे गांव के कई ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से एक आवेदन देकर फरवरी से मई के बीच हुई आठ संदिग्ध मौतों की जांच की मांग की थी। ग्रामीणों ने अपने आवेदन में गांव के ही निवासी रामसहाय जायसवाल पर संदेह जताया था। उनका कहना था कि जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से अधिकांश का किसी न किसी रूप में आरोपी से विवाद या संपर्क रहा था।
indiatv की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान सात मृतकों के शवों को कब्र से बाहर निकाला गया और उन्हें रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल भेजा गया, जहां विशेषज्ञों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। पुलिस का मानना है कि यह जांच पूरे मामले की सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हुई।
फॉरेंसिक जांच से मिले अहम सुराग
अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद मृतकों के डीएनए, विसरा और अन्य आवश्यक नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इन रिपोर्टों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा रही है। हालांकि मृतकों में शामिल बुधराम जायसवाल का अंतिम संस्कार पहले ही कर दिया गया था, इसलिए उसके मामले में अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी ने गांव के ही एक व्यक्ति से चूहा मारने की दवा बताकर सुहागा नामक जहरीला पदार्थ हासिल किया था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय लोगों के बयानों और अन्य तथ्यों के आधार पर रामसहाय से विस्तृत पूछताछ की।
पूछताछ में कबूला कई हत्याओं का आरोप
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि पुरानी रंजिश, छोटी-छोटी बातों पर हुए विवाद, गाली-गलौज, चरित्र को लेकर संदेह और टोना-टोटका जैसी बातों से नाराज होकर उसने लोगों को निशाना बनाया।
आरोपी पर आरोप है कि वह शराब में जहर मिलाकर लोगों को पिलाता था और बाद में उनकी मौत हो जाती थी। पुलिस के मुताबिक उसने आठ लोगों की हत्या करने के साथ-साथ एक अन्य व्यक्ति की हत्या का प्रयास भी किया था। आरोपी के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
कुत्ते पर किया था पहला परीक्षण
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार आरोपी ने अपनी कथित योजना को अंजाम देने से पहले जहर का असर परखने के लिए एक कुत्ते पर उसका परीक्षण किया था। पुलिस का कहना है कि जब उसे यह विश्वास हो गया कि जहरीला पदार्थ जानलेवा है, तब उसने इंसानों को निशाना बनाना शुरू किया।
बताया जा रहा है कि 6 फरवरी को उसने गांव निवासी बद्री को शराब में जहर मिलाकर पिला दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद कथित तौर पर सिलसिला यहीं नहीं रुका और उसने अलग-अलग तारीखों में अन्य लोगों को भी निशाना बनाया।
एक-एक कर आठ लोगों की मौत
पुलिस के अनुसार आरोपी ने 20 फरवरी को बुठालु, 12 मार्च को छत्तूराम, 20 मार्च को बुधराम, 31 मार्च को विनोद कुमार, 28 अप्रैल को गजानंद, 29 अप्रैल को चैतूराम और 14 मई को महेतरू राम को जहर देकर मार डाला। सभी मामलों में कथित तौर पर शराब को माध्यम बनाया गया।
इन लगातार मौतों ने गांव में डर और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया था। हालांकि शुरुआत में किसी को स्पष्ट रूप से संदेह नहीं था कि सभी घटनाएं आपस में जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन जैसे-जैसे मामले सामने आते गए, लोगों को एक पैटर्न नजर आने लगा और आखिरकार पुलिस तक शिकायत पहुंची।
एक व्यक्ति बच गया तो खुली साजिश की परतें
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 14 अप्रैल को आरोपी ने गांव के ही कार्तिक नामक व्यक्ति को भी कथित रूप से जहरीली शराब पिलाई थी। हालांकि उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया, जिससे उसकी जान बच गई।
अधिकारियों का मानना है कि कार्तिक का बच जाना जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। इससे पुलिस को घटनाओं की श्रृंखला को समझने और आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली। फिलहाल पुलिस इस मामले के सभी पहलुओं की विस्तार से जांच कर रही है।
अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था आरोपी
मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह भी बताया जा रहा है कि आरोपी किसी को अपने ऊपर शक न हो, इसके लिए मृतकों को अस्पताल ले जाने में मदद करता था और कई मामलों में उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। गांव के लोग उसे सामान्य व्यक्ति मानते रहे और किसी को अंदाजा नहीं था कि वह कथित तौर पर उन्हीं लोगों की मौत के पीछे हो सकता है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आठ हत्या और एक हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और ग्रामीण अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक यह कथित सिलसिला बिना किसी शक के कैसे चलता रहा।













