भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स के फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने महिला हॉकी में 44 साल से चले आ रहे स्वर्ण पदक के इंतजार को खत्म किया। टीम इंडिया ने इस प्रदर्शन के दम पर 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है।
फाइनल मुकाबले में भारत और चीन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए और चीन पर दबाव बनाने की कोशिश की। मैच में भारत की ओर से सिर्फ एक गोल हुआ और इसके बाद दोनों टीमों की ओर से कोई और गोल नहीं किया जा सका। यही एक गोल अंत में भारतीय टीम की जीत का आधार बना।
10वें मिनट में लालरेमसियामी ने दिलाई बढ़त
भारत को मुकाबले की शुरुआत में ही एक झटका लगा, जब छठे मिनट में बलजीत कौर को ग्रीन कार्ड दिखाया गया। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने अपने आक्रमण को जारी रखा और चीन को संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया।
मैच के 10वें मिनट में भारत को वह सफलता मिली, जिसने पूरे मुकाबले की दिशा तय कर दी। लालरेमसियामी ने शानदार फील्ड गोल करते हुए चीन के गोलपोस्ट को भेद दिया और भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। खास बात यह रही कि लालरेमसियामी के लिए यह उनका 200वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था। इस महत्वपूर्ण मैच में गोल करके उन्होंने अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच को भी यादगार बना दिया।
गोल के बाद भारत के पास बढ़त को मजबूत करने का मौका भी आया। टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इस मौके को गोल में नहीं बदल सकीं। इसके बावजूद टीम ने अपना नियंत्रण बनाए रखा और पहला क्वार्टर खत्म होने तक 1-0 की बढ़त बरकरार रखी।
दूसरे क्वार्टर में चीन ने बढ़ाया दबाव
दूसरे क्वार्टर में मुकाबले का रुख कुछ बदला और चीन ने भारतीय टीम पर लगातार हमले करने शुरू किए। चीन की खिलाड़ियों ने बराबरी का गोल करने के लिए आक्रामक हॉकी खेली और भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया।
चीन को बराबरी का सबसे बड़ा अवसर उस समय मिला, जब उसे पेनल्टी स्ट्रोक मिला। इस मौके पर भारतीय टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव किया। उन्होंने चीन को गोल करने से रोक दिया और भारत की 1-0 की बढ़त को कायम रखा।
सविता के इस बचाव के बाद भी चीन ने हमले जारी रखे। भारतीय टीम को इस चरण में ज्यादातर समय रक्षात्मक खेल पर ध्यान देना पड़ा, लेकिन डिफेंडरों ने चीन के लगातार प्रयासों को नाकाम किया। भारत ने हाफ टाइम तक अपनी बढ़त नहीं गंवाई।
इसी क्वार्टर में चीन की वेन डान को भी फाउल के लिए ग्रीन कार्ड दिखाया गया। खेल के 28वें मिनट में मिली इस सजा के बावजूद चीन भारतीय टीम के खिलाफ बराबरी का गोल नहीं कर सका।
44 साल का इंतजार हुआ खत्म
चीन के खिलाफ फाइनल में मिली 1-0 की जीत भारतीय महिला हॉकी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। टीम ने दूसरी बार महिला हॉकी में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता और 44 साल से चले आ रहे इंतजार को समाप्त किया।
इस जीत का एक और बड़ा महत्व है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने इसके साथ 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में अपनी जगह भी पक्की कर ली है। इस तरह चीन के खिलाफ फाइनल की जीत ने भारत को स्वर्ण पदक के साथ ओलंपिक क्वालीफिकेशन भी दिलाया।
फाइनल में लालरेमसियामी का गोल और सविता पूनिया का पेनल्टी स्ट्रोक पर बचाव भारतीय टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ। एक गोल की बढ़त के बावजूद टीम ने चीन के दबाव का सामना किया और मुकाबले को 1-0 के स्कोर पर अपने पक्ष में समाप्त किया।













