भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर समीक्षा बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया गया। इस बदलाव के बाद पॉलिसी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। रेपो रेट में यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद पहली बार हुई है। यानी करीब तीन साल से अधिक समय बाद आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती के बजाय बढ़ोतरी का रास्ता चुना है। केंद्रीय बैंक का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं और कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।
MPC ने सर्वसम्मति से लिया फैसला
गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, मौजूदा आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा के बाद मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी अन्य नीतिगत दरों में भी बदलाव किया है। रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत होने के साथ स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5.25 प्रतिशत पर समायोजित किया गया है। वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो गए हैं।
आम लोगों के कर्ज पर क्या होगा असर?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर अलग-अलग तरह के कर्ज की ब्याज दरों पर देखने को मिल सकता है। खास तौर पर नए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों पर इसका असर पड़ सकता है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने की स्थिति में कर्ज की लागत बढ़ सकती है और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन की EMI में भी बदलाव संभव है। हालांकि, वास्तविक असर संबंधित बैंक की ब्याज दर और ग्राहक के लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।
#WATCH | RBI hikes policy repo rate by 25 basis point to 5.5% https://t.co/92jeQuC3wz
— ANI (@ANI) October 7, 2026
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण वैश्विक आर्थिक माहौल अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियों में व्यापक स्तर पर मजबूती दिखाई दे रही है।
केंद्रीय बैंक का आकलन है कि आने वाले समय में भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए रखने में सक्षम हो सकती है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
2025 में 125 बेसिस पॉइंट की हुई थी कटौती
रेपो रेट बढ़ाने का मौजूदा फैसला पिछले साल अपनाए गए रुख से अलग है। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, 2025 के दौरान महंगाई में राहत को देखते हुए आरबीआई ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। अब वैश्विक स्तर पर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई से जुड़ी चिंताओं को फिर बढ़ाया है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर की नीति समीक्षा में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है। रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के साथ आरबीआई ने महंगाई और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। आने वाले समय में इस फैसले का असर कर्ज की लागत और ब्याज दरों के साथ-साथ व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है।














