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UPI चार्ज के मुद्दे पर राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला, बोले- ‘अमेरिकी दबाव के आगे फिर सरेंडर कर रहे हैं’

UPI चार्ज के मुद्दे पर राहुल गांधी ने PM मोदी पर अमेरिकी दबाव में आने का आरोप लगाया। 2000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR को लेकर विवाद।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 15 Sep 2026 5:26:03

UPI चार्ज के मुद्दे पर राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला, बोले- ‘अमेरिकी दबाव के आगे फिर सरेंडर कर रहे हैं’

केंद्र सरकार की ओर से 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर किसी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाने की व्यवस्था के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने का रास्ता खोल दिया है और यह कदम अमेरिकी दबाव के आगे झुकने जैसा है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने 15 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। उनके मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR लगाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि संख्या के लिहाज से ऐसे लेनदेन करीब 5 प्रतिशत हैं, लेकिन UPI के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार भले ही कह रही हो कि ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन मर्चेंट पर लगने वाला खर्च आखिरकार वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकता है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे फिर सरेंडर करने का आरोप लगाया।

सरकार ने 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर क्या कहा?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क लेने से रोका गया है। यही व्यवस्था RuPay-powered debit card से किए गए भुगतान पर भी लागू है।

सरकार ने इससे पहले अगस्त में स्पष्ट किया था कि आम उपभोक्ताओं से UPI भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार के अनुसार सभी person-to-person यानी P2P UPI लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। भविष्य में यदि MDR लागू किया जाता है तो वह केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर सीमित मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा और उसकी दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड के MDR से काफी कम रखी जाएगी।

2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर क्या स्थिति है?

मौजूदा विवाद का मुख्य मुद्दा यही है कि 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन उससे अधिक के मर्चेंट लेनदेन के लिए शुल्क की व्यवस्था को लेकर सरकार की अधिसूचना में स्पष्ट दर या तत्काल लागू होने वाले शुल्क का उल्लेख नहीं है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इसी अस्पष्टता को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।

Reuters के अनुसार, भारतीय भुगतान प्राधिकरण बैंकों और पेमेंट कंपनियों के साथ 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर बातचीत कर रहा है। रिपोर्ट में संभावित MDR को 0.4 प्रतिशत तक रखने की चर्चा का उल्लेख है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सरकार पहले ही दे चुकी है सफाई

केंद्र सरकार ने अगस्त में कहा था कि Payment and Settlement Systems Act में किया गया बदलाव UPI उपयोगकर्ताओं पर तत्काल शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं है, बल्कि भविष्य में सीमित मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू करने के लिए सक्षम व्यवस्था तैयार करता है। सरकार ने यह भी कहा था कि UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और तकनीकी ढांचे पर लगातार खर्च की जरूरत है।

इसलिए राहुल गांधी का अमेरिकी दबाव वाला आरोप राजनीतिक दावा है। उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण में अमेरिकी कंपनियों के दबाव को UPI शुल्क व्यवस्था का कारण नहीं बताया गया है। वहीं कांग्रेस इस बदलाव को लेकर सरकार की नीति और उसके संभावित प्रभाव पर सवाल उठा रही है।

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