
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। शताब्दी वर्ष समारोह के अंतिम दिन उनसे सवाल किया गया कि क्या 75 वर्ष की आयु में राजनीति और संगठन से पीछे हट जाना चाहिए? इस पर भागवत ने कहा कि उम्र को आधार बनाकर रिटायर होने की कोई जरूरत नहीं है। “न मैं रिटायर होऊंगा, न किसी को रिटायर होने के लिए कहूंगा। हम तब तक काम कर सकते हैं जब तक हमारी इच्छा हो,” उन्होंने जोड़ा।
भागवत ने कहा कि उन्होंने अपने विचार व्यक्त करने के लिए मोरोपंत जी के बयान का हवाला लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य यह नहीं था कि वे स्वयं रिटायर हो जाएं या दूसरों से ऐसा करने के लिए कहें। “हम जीवन के किसी भी पड़ाव पर रिटायर होने के लिए तैयार हैं और संघ हमें जिस समय तक काम करना चाहेगा, हम उसी समय तक काम करने के लिए भी तैयार हैं।”
#WATCH | Delhi | On the question of Should Indian leaders retire at the age of 75 years, RSS chief Mohan Bhagwat says, "...I never said I will retire or someone should retire. In Sangh, we are given a job, whether we want it or not. If I am 80 years old, and Sangh says go and… pic.twitter.com/p8wq03IKYj
— ANI (@ANI) August 28, 2025
मोरोपंत पिंगले की हाजिरजवाबी का उदाहरण
भागवत ने मोरोपंत पिंगले के हास्य और विनोद को उद्धृत करते हुए बताया कि उनकी हाजिरजवाबी सुनकर लोग खुशी से कुर्सियों पर उछल पड़ते थे। उन्होंने याद किया कि एक कार्यक्रम में, जब पिंगले ने अपने 70 वर्ष पूरे किए, तो उन्हें शॉल भेंट की गई। मोरोपंत ने खड़े होकर कहा, “आप सोच रहे होंगे कि आपने मुझे सम्मानित किया है, लेकिन मैं जानता हूं कि इस शॉल का मतलब है कि आप शांति से बैठें और देखें कि क्या हो रहा है। मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा और दूसरों को भी इसके लिए कहूंगा।”
75 वर्ष की उम्र पर विदाई की बात
कुछ दिन पहले भागवत ने यह भी कहा था कि 75 वर्ष की उम्र बधाई का नहीं, बल्कि विदाई का समय होता है। उनका मानना है कि इस उम्र में नेताओं को रिटायर हो जाना चाहिए। यह बयान उन्होंने 9 जुलाई को संघ विचारक मोरोपंत पिंगले पर आधारित पुस्तक ‘मोरोपंत पिंगले: द आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्जेंस’ के विमोचन के दौरान दिया।
भागवत ने आगे कहा कि 75 वर्ष की उम्र में शॉल ओढ़ाने का मतलब होता है कि अब उम्र पूरी हो गई है और दूसरों को अवसर देना चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया, क्योंकि मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ही सितंबर 2025 में 75 वर्ष के हो जाएंगे। संघ प्रमुख का जन्मदिन 11 सितंबर और पीएम मोदी का 17 सितंबर को आता है।














