चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का एक पुराना भाषण साझा किया है। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ओर से उठाई जा रही मांगों के बीच सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लगातार की जा रही है। इसी बीच किरेन रिजिजू ने कपिल सिब्बल का संसद में कानून मंत्री के तौर पर दिया गया पुराना भाषण साझा करते हुए उनके रुख की तारीफ की। रिजिजू ने कहा कि सामान्य तौर पर उन्हें कपिल सिब्बल पसंद नहीं हैं, लेकिन इस मामले में पहली बार उन्हें सिब्बल की बात पसंद आई। रिजिजू ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि वह सिब्बल के पुराने भाषण को मौजूदा विवाद के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण मानते हैं।
रिजिजू ने कपिल सिब्बल पर क्या कहा
कपिल सिब्बल का पुराना वीडियो साझा करते हुए किरेन रिजिजू ने लिखा कि उन्हें सिब्बल पसंद नहीं हैं, क्योंकि उनके मुताबिक वह अक्सर भ्रष्ट, चरमपंथी और असामाजिक तत्वों का बचाव करते हुए पाए जाते हैं। हालांकि, रिजिजू ने कहा कि पहली बार उन्हें सिब्बल पसंद आए हैं। रिजिजू के मुताबिक, इसकी वजह सिब्बल का वह पुराना भाषण है, जो उन्होंने कानून मंत्री रहते हुए संसद में दिया था। रिजिजू का दावा है कि इस भाषण के जरिए सिब्बल ने कांग्रेस की ओर से किए जा रहे कथित 'वोट चोरी' के दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहा था कपिल सिब्बल ने
रिजिजू द्वारा साझा किए गए वीडियो में कपिल सिब्बल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को समझाते हुए दिखाई देते हैं। वह बताते हैं कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया अलग-अलग परिस्थितियों में हो सकती है। सिब्बल के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में अपना निवास स्थान बदल लेता है, तो उसका नाम पुराने निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह मतदाता नहीं रहेगा। उसका नाम नए निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का नाम एक साथ दो निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में नहीं रह सकता। यदि किसी व्यक्ति ने अपना निवास स्थान बदल लिया है और उसका नाम पुराने निर्वाचन क्षेत्र में भी दर्ज है तथा नए निर्वाचन क्षेत्र में भी दर्ज हो गया है, तो दोनों में से एक प्रविष्टि को हटाना होगा। सिब्बल ने मतदाता की मृत्यु की स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यदि किसी मतदाता का निधन हो गया है तो मतदाता सूची से उसका नाम हटाना आवश्यक होता है।
I don`t like Kapil Sibal as he is always found to be protecting the corrupt, extremists & anti social elements. For the first time, I like him because he has exposed the bogus vote chori drama of Congress party through his old speech in Parliament as Law Minister!! https://t.co/7o51J7UMfC
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) October 6, 2026
नाम हटने पर क्या कर सकता है मतदाता
वीडियो में सिब्बल व्यक्तिगत शिकायतों से जुड़ी स्थिति का भी उल्लेख करते हैं। वह कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को मतदाता सूची से संबंधित कोई शिकायत है तो संबंधित लोगों को चुनाव आयोग से संपर्क कर अपनी समस्या बतानी चाहिए। सिब्बल के मुताबिक, ऐसे मतदाताओं को चुनावी पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ के पास जाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और खुद को दोबारा पंजीकृत कराने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हट गया है, तब भी वह दोबारा पंजीकरण के लिए ईआरओ के पास आवेदन कर सकता है। उनके मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ईआरओ को यह बता सकता है कि वह दिए गए पते पर रहता है और उसका नाम गलती से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इसके बाद सूची में जरूरी सुधार किया जा सकता है।
सिब्बल ने मतदाता सूची को बताया था लगातार अपडेट होने वाली प्रक्रिया
सिब्बल के इस पुराने भाषण में मतदाता सूची को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया का भी जिक्र है। वीडियो में वह बताते हैं कि 5 जुलाई से 2 अगस्त के बीच 6,44,105 लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, साझा किए गए वीडियो से इस आंकड़े का वर्ष स्पष्ट नहीं होता है। सिब्बल ने कहा था कि मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाता है और यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उनके मुताबिक, किसी दिए गए वर्ष में एक निर्धारित तारीख के आधार पर मतदाता सूची तैयार होती है, लेकिन पूरे साल इसमें बदलाव की प्रक्रिया जारी रहती है।
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से मतदाता सूची से हटा दिया गया है तो वह ईआरओ के पास जाकर अपना नाम दोबारा शामिल कराने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए उसे अपना पता और वहां रहने की जानकारी देनी होगी, जिसके बाद गलती को ठीक किया जा सकता है। इस पुराने भाषण को साझा करते हुए रिजिजू ने मौजूदा एसआईआर विवाद के बीच विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाया है। वहीं, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध कर रहा है।














