
भारत और चीन अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए संभावित रूप से एक संयुक्त रणनीति पर विचार कर सकते हैं। अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर बातचीत हो सकती है। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं चीन की ओर से संकेत मिल चुके हैं कि अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए दोनों देशों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
मोदी की जापान और चीन यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जापान और चीन की यात्रा पर रहेंगे। यात्रा की शुरुआत वे जापान से करेंगे, जहां वे भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 31 अगस्त को मोदी चीन रवाना होंगे और 1 सितंबर को एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, मंगलवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा होगी।
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर असर
भारत से अमेरिका को सालाना लगभग 86 अरब डॉलर का निर्यात होता है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने 27 अगस्त से इस पर 50% अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके चलते अमेरिका को जाने वाले भारतीय निर्यात में 70% तक गिरावट आ सकती है। ऐसे में भारत अपनी निर्यात दर को संतुलित करने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
चीन के साथ सहयोग की संभावनाएँ
भारत और चीन की संभावित वार्ता इस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अटकलें हैं कि भारत चीन के बिल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल होकर पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के देशों में अपने निर्यात को बढ़ाने के अवसर तलाश सकता है।
इस रणनीति से न केवल अमेरिकी टैरिफ का असर कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत-चीन के आर्थिक सहयोग को भी नया आयाम मिलेगा।














