
पिछले कुछ हफ़्तों में सोने के दामों में तेज़ी से उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अस्थिरता और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच सितंबर की शुरुआत में ही सोना नई ऊंचाई पर पहुंच गया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगस्त के अंतिम 10 दिनों में ही सोना लगभग ₹3000 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है।
त्योहारी सीजन से बढ़ी मांग
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ़ वैश्विक हालात की वजह से नहीं, बल्कि भारत में त्योहारों के मौसम की वजह से भी है। दशहरा और दिवाली से पहले आमतौर पर लोग सोने की खरीदारी करते हैं, और इस साल मांग इतनी तेज़ है कि रेट रिकॉर्ड स्तर छू सकते हैं।
निवेशकों की पहली पसंद बना सोना
आर्थिक असुरक्षा, महंगाई और अमेरिका में टैरिफ़ से जुड़ी चर्चाओं के चलते निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। यही वजह है कि आज यानी 2 सितंबर 2025 को देशभर में 24 कैरेट सोना ₹1,06,090 प्रति 10 ग्राम बिक रहा है। इसमें पिछले दिन की तुलना में ₹210 की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, 22 कैरेट सोना ₹200 और 18 कैरेट सोना ₹160 महंगा हो गया है।
24, 22 और 18 कैरेट सोने का फर्क
विशेषज्ञ बताते हैं कि 24 कैरेट सोना पूरी तरह शुद्ध होता है और निवेशक इसे सेविंग्स के तौर पर ज्यादा पसंद करते हैं। दूसरी ओर, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोना मुख्यतः आभूषण बनाने के लिए खरीदा जाता है।
आपके शहरों के ताज़ा रेट
दिल्ली: 24 कैरेट ₹1,06,240, 22 कैरेट ₹97,400, 18 कैरेट ₹79,690 प्रति 10 ग्राम।
मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल और पुणे: 24 कैरेट ₹1,06,090 और 22 कैरेट ₹97,250 प्रति 10 ग्राम।
सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारण
सोने और चांदी के रेट रोज़ाना बदलते हैं, जिन पर कई कारक असर डालते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इन धातुओं की कीमतें अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं। इसलिए डॉलर-रुपया विनिमय दर का सीधा असर पड़ता है।
अगर डॉलर मज़बूत होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमतें स्वतः बढ़ जाती हैं।
भारत में ज़्यादातर सोना आयात किया जाता है, इसलिए इंपोर्ट ड्यूटी, GST और स्थानीय टैक्स भी इसकी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वैश्विक अस्थिरता जैसे युद्ध, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव या आर्थिक मंदी भी सोने को महंगा बना देती है। निवेशक ऐसे समय में शेयर बाज़ार की बजाय सोने में पैसा लगाना सुरक्षित मानते हैं।














