एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी मिलने में हो रही देरी का मुद्दा अब राजनीतिक चर्चा में आ गया है। शिवसेना यूबीटी की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले में मस्क के पक्ष में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियामकीय देरी का असर उन तीन कंपनियों पर पड़ रहा है, जिन्हें देश में काम करने के लिए शुरुआती स्तर की मंजूरियां मिल चुकी हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को व्यावसायिक रूप से शुरू करने के लिए अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी अंतिम व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। उन्होंने इस संदर्भ में स्टारलिंक के अलावा जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशन्स और यूटेलसैट वनवेब का भी उल्लेख किया।
स्टारलिंक समेत तीन कंपनियों की सेवाएं क्यों अटकी हैं?
प्रियंका चतुर्वेदी के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी तीन कंपनियों के पास शुरुआती स्तर की अनुमति है, लेकिन वे अभी व्यावसायिक सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी हासिल नहीं कर पाई हैं। इन कंपनियों में एलन मस्क की स्पेसएक्स की स्टारलिंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशन्स और भारती एयरटेल समर्थित यूटेलसैट वनवेब शामिल हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन्स बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस और IN-SPACe से जुड़ी शुरुआती मंजूरी मिलने के बावजूद अंतिम स्तर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। सुरक्षा से संबंधित आकलन और स्पेक्ट्रम आवंटन का ढांचा तैयार होने तक कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति नहीं मिली है। इस देरी को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाते हुए लिखा, “हेलो ओलिगार्क, तुम कहां हो?” उनकी यह टिप्पणी एलन मस्क के उस बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत में आ रही बाधाओं के लिए कुछ प्रभावशाली समूहों को जिम्मेदार ठहराया था।
एलन मस्क ने भारत में किन समूहों पर लगाए आरोप?
स्टारलिंक के भारत में परिचालन शुरू करने की कोशिशों के बीच एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने दावा किया कि भारत में कुछ प्रभावशाली समूह अपनी एकाधिकार वाली स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को शुरू होने से रोक रहे हैं। मस्क ने 11,000 से अधिक गांवों में मोबाइल कवरेज उपलब्ध नहीं होने से जुड़ी एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कुछ समूह भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक के रास्ते में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को भारत के लोगों के खिलाफ अपराध बताते हुए संबंधित समूहों की पहचान को लेकर भी टिप्पणी की थी। मस्क का आरोप है कि उनकी कंपनी को भारत में सेवा शुरू करने से रोका जा रहा है, जबकि वह कई वर्षों से यहां काम करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, संदर्भ सामग्री में इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित कंपनियों और सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
प्रियंका चतुर्वेदी के बयान में ‘ओलिगार्क’ का क्या मतलब है?
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में ‘ओलिगार्क’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस शब्द का सामान्य अर्थ ऐसे बेहद धनी और प्रभावशाली कारोबारी या उद्योगपति से है, जिनकी आर्थिक ताकत और राजनीतिक पहुंच के कारण सरकारी नीतियों या सत्ता पर असाधारण प्रभाव हो सकता है। इससे जुड़ी व्यवस्था को ओलिगार्की कहा जाता है, जिसे हिंदी में अल्पतंत्र या कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित सत्ता के रूप में समझा जा सकता है। मस्क ने भी अपने बयान में कुछ प्रभावशाली समूहों पर एकाधिकार बनाए रखने का आरोप लगाया था। प्रियंका चतुर्वेदी की टिप्पणी इसी मुद्दे से जुड़ी है। उनके पोस्ट में सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों की मंजूरी में देरी और प्रभावशाली कारोबारी समूहों की भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया है। इस तरह स्टारलिंक को भारत में अंतिम मंजूरी मिलने का मामला केवल कंपनी की सेवा शुरू करने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा आकलन, स्पेक्ट्रम आवंटन और बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।














