देश में जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस बार जनगणना की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक समय तक चलेगी। लोगों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 15 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद जनगणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाएंगे।
जनगणना के दूसरे चरण में कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, परिवार, माता-पिता की जानकारी और प्रवास से जुड़े सवाल शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट और बैंक खातों की संख्या जैसी जानकारियां भी मांगी जाएंगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें 29 सवाल पूछे गए थे। इस बार सवालों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है।
गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में जनसंख्या गणना की तारीखों की जानकारी दी गई है। हालांकि, विधानसभा चुनाव वाले चार राज्यों के लिए पहले से अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
10 जनवरी से शुरू होगी स्व-गणना की प्रक्रिया
देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत 25 जनवरी 2027 से होगी। इससे पहले लोगों को 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था के तहत लोग निर्धारित ऑनलाइन माध्यम से अपनी और परिवार के सदस्यों की जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणनाकर्मी घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना करेंगे। अधिसूचना के मुताबिक, सामान्य कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर जनसंख्या गणना का काम 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक संशोधन का चरण आयोजित किया जाएगा। इस तरह स्व-गणना के 15 दिन और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के 35 दिनों को मिलाकर यह प्रक्रिया लगभग 50 दिनों तक चलेगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है।
यूपी, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में पहले होगी जनगणना
विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम देश के बाकी हिस्सों से अलग रखा गया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना पहले कराई जाएगी। इन राज्यों में स्व-गणना की प्रक्रिया 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगी। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनगणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटाएंगे। इस चरण के बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक संशोधन की प्रक्रिया होगी। इस तरह इन चार राज्यों में भी स्व-गणना और घर-घर जाकर जनसंख्या की जानकारी जुटाने का कार्यक्रम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह अलग समय-सारणी निर्धारित की है।
जनगणना में पूछे जाएंगे जाति समेत 40 सवाल
जनगणना 2027 के दूसरे चरण में लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इस बार जाति से संबंधित जानकारी भी जनगणना का हिस्सा होगी। इसके अलावा व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े कई सवाल शामिल किए गए हैं।
जनगणना के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां जुटाई जाएंगी:
- व्यक्ति का नाम और परिवार के मुखिया से उसका संबंध
- पति या पत्नी का नाम
- माता और पिता से संबंधित जानकारी
- जन्मतिथि और उम्र
- वैवाहिक स्थिति और शादी के समय उम्र
- व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता
- धर्म और जाति से संबंधित जानकारी
- स्थायी पता
- जन्म स्थान और पिछला निवास स्थान
- प्रवास का कारण और वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि
- मातृभाषा और अन्य भाषाओं की जानकारी
- साक्षरता और डिजिटल साक्षरता
- शैक्षणिक योग्यता और पढ़ाई से जुड़ी जानकारी
- दिव्यांगता से संबंधित जानकारी
- रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियों का विवरण
- काम की तलाश और रोजगार के लिए उपलब्धता
- काम पर आने-जाने से संबंधित जानकारी
- कोविड-19 टीकाकरण की जगह
- कुल बैंक खातों की संख्या
- मोबाइल नंबर
- आधार नंबर
- मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी नंबर
- पासपोर्ट नंबर
- ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
इसके अलावा महिलाओं से बच्चों के जन्म और जीवित बच्चों की संख्या से संबंधित जानकारी भी निर्धारित श्रेणियों के तहत जुटाई जाएगी।
आधार, मोबाइल और वोटर आईडी की जानकारी देना होगा विकल्प
जनगणना के दौरान कुछ पहचान संबंधी जानकारियां भी मांगी जाएंगी। इनमें मोबाइल नंबर, आधार नंबर और मतदाता पहचान पत्र का नंबर शामिल है। हालांकि, इन जानकारियों को उपलब्ध होने की स्थिति में साझा किया जा सकेगा। पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट रखने वाले लोगों से मांगा जाएगा। वहीं, ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता के बारे में भी सवाल पूछा जाएगा। जनगणना में जुटाई जाने वाली जानकारी का इस्तेमाल देश की आबादी, सामाजिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ा आंकड़ा तैयार करने के लिए किया जाएगा।
मणिपुर में फिलहाल जनगणना का कार्यक्रम नहीं
केंद्र सरकार ने मणिपुर को फिलहाल जनगणना 2027 के घोषित कार्यक्रम से बाहर रखा है। राज्य में जनगणना कब कराई जाएगी, इस बारे में अभी नई तारीख घोषित नहीं की गई है। दरअसल, मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया पहले कराने की मांग उठी थी। राज्य के विभिन्न वर्गों की ओर से यह मांग किए जाने के बाद जनगणना की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया गया। 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में भी मणिपुर को अगली घोषणा तक मौजूदा कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का काम पहले ही सितंबर 2026 में पूरा किया जा चुका है। इन क्षेत्रों के लिए अलग संदर्भ तिथि निर्धारित की गई थी।
2011 में हुई थी देश की पिछली जनगणना
भारत में पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी। उस समय देश की कुल आबादी 1.21 अरब दर्ज की गई थी। इसमें 62.32 करोड़ पुरुष और 58.75 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा देश में कुल 24.95 करोड़ परिवार दर्ज किए गए थे। जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब 2027 में होने वाली जनगणना दो चरणों में आयोजित की जा रही है। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाने का काम किया गया, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी एकत्र की जाएगी। यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना भी होगी। इसमें जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने के साथ लोगों को स्व-गणना की सुविधा भी दी जा रही है। जनगणना के दूसरे चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों की प्रश्नावली और अलग-अलग राज्यों की समय-सारणी आधिकारिक तौर पर अधिसूचित की गई है। सामान्य राज्यों के लिए 30 अक्टूबर की अधिसूचना और चार चुनावी राज्यों के लिए 5 सितंबर की अधिसूचना लागू होगी।














