
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब नए दौर की ओर कदम बढ़ा रही है। स्वतंत्रता दिवस के बाद पार्टी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर सकती है। यह निर्णय पार्टी के कुछ प्रमुख राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद लिया जाएगा।
इस खबर ने भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। वहीं एक दिलचस्प बात यह भी है कि अब तक भाजपा और आरएसएस के बीच किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है।
पार्टी के वैचारिक स्तंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भाजपा नेतृत्व को सुझाव दिया है कि अध्यक्ष वही हो जिसे संगठनात्मक अनुभव हो और जिसकी पार्टी में निष्पक्ष छवि बनी हो। यह सुझाव भी कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि पार्टी केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि परिपक्वता और स्थिर नेतृत्व की तलाश में है।
सूत्रों की मानें, तो चार प्रमुख नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है—जो न केवल अनुभव में समृद्ध हैं, बल्कि संगठन की नब्ज़ को भी बखूबी समझते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान – ओडिशा से आने वाले और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम सबसे ऊपर है। संगठन में उनकी लंबी पारी और कुशल रणनीतिक समझ उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
भूपेंद्र यादव – केंद्रीय मंत्री और अमित शाह के करीबी माने जाने वाले भूपेंद्र यादव संगठन के हर स्तर पर काम कर चुके हैं। उनकी तेज़तर्रार शैली और राजनीतिक संतुलन उन्हें खास बनाता है।
शिवराज सिंह चौहान – मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि मंत्री, शिवराज सिंह चौहान का नाम भी चर्चा में है। उनकी जनप्रिय छवि और संगठनात्मक पकड़ उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है।
बीडी शर्मा – हाल ही में इस दौड़ में शामिल हुए बीडी शर्मा संगठन के भीतर गहरी पकड़ रखते हैं। उन्हें जमीनी कार्यकर्ता का समर्थन भी प्राप्त है।
इन सभी नामों को उनकी व्यापक स्वीकार्यता और संगठन में अनुभव के आधार पर प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।
पार्टी की रणनीति है कि पहले भाजपा की केंद्रीय परिषद की बैठक बुलाई जाए, जहां इन चारों नामों में से एक पर आम सहमति बनाई जा सके।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया, "अब लगभग तय माना जा रहा है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम 15 अगस्त के बाद घोषित होगा।"
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के प्रभारी डॉ. के. लक्ष्मण ने भी इस प्रक्रिया की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि देशभर के 10 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव लगभग पूरे हो चुके हैं। केवल उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा शेष है।
उन्होंने कहा, “अभी अंतिम समयसीमा तय नहीं हुई है, लेकिन चुनाव के लिए देशभर के 10 लाख से अधिक बूथों पर मतदान कराया जाएगा।”
यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि भाजपा पहले ही 10 लाख बूथों में से 7.5 लाख बूथ प्रभारी नियुक्त कर चुकी है—जो इस बात का संकेत है कि पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में पूरी तरह तैयार है।














