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घुसपैठियों पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- ‘ये देश धर्मशाला नहीं’, जल्द खत्म करेंगे घुसपैठ

अमित शाह ने NSSC में कहा कि भारत को घुसपैठ मुक्त बनाना लक्ष्य है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, नारकोटिक्स और AI के इस्तेमाल पर जोर दिया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 26 Aug 2026 9:12:26

घुसपैठियों पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- ‘ये देश धर्मशाला नहीं’, जल्द खत्म करेंगे घुसपैठ

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आसूचना ब्यूरो (IB) के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSSC) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को कम समय में घुसपैठियों से मुक्त करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि देश में रहने का अधिकार उसके नागरिकों को है और घुसपैठिए सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा जनसांख्यिकी के लिए खतरा हैं।

2047 के विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा पर जोर

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। उनके मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करने की पहली जरूरत मजबूत आंतरिक सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि देश को अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ना है तो आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी होगा।

गृह मंत्री ने नारकोटिक्स, नक्सलवाद और नॉर्थ ईस्ट से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर पिछली सरकारों ने इन समस्याओं के गंभीर रूप लेने से पहले उनके रुझानों को पहचाना होता, तो देश को लंबे समय तक इनका सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने में राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के योगदान को श्रेय दिया।

‘बहुत कम समय में देश को घुसपैठिया मुक्त बनाना लक्ष्य’

NSSC में भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर भी अमित शाह ने अधिकारियों को दिशा दी। उन्होंने कहा कि अगले 15 से 20 वर्षों के संभावित रुझानों का आकलन कर यह तय किया जाना चाहिए कि कौन-सी समस्याएं उभर सकती हैं और उन्हें रोकने के लिए पहले से क्या रणनीति बनाई जाए।

सीमा सुरक्षा के संबंध में शाह ने बताया कि पिछले आठ महीनों में उन्होंने सभी भूमि-सीमा वाले राज्यों का दौरा किया और राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा के लिए चतुष्कोणीय दृष्टिकोण से जुड़ा दस्तावेज साझा किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कम समय में देश को घुसपैठ से मुक्त करना है।

घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “ये देश धर्मशाला नहीं है।” उनके अनुसार देश के नागरिकों को ही यहां रहने का अधिकार है और घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं।

आतंकवाद और नशे के खिलाफ 360 डिग्री रणनीति

अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को केवल दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय उसे नियमित सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क को 360 डिग्री दृष्टिकोण से खत्म करने पर जोर दिया।

नारकोटिक्स के खिलाफ उन्होंने ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ यानी तीन D के आधार पर काम करने की बात कही। उन्होंने राज्यों की पुलिस से नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को जमीन पर लागू करने का आह्वान किया, ताकि नई पीढ़ी को नशे से सुरक्षित रखने की दिशा में काम किया जा सके।

AI से सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत करने की अपील

गृह मंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने CCTNS, ICJS, NatGrid और NAFIS के एकीकृत डेटा बैंक का उल्लेख करते हुए युवा अधिकारियों से डेटा इंटीग्रेशन और विश्लेषण के लिए AI का इस्तेमाल करने को कहा।

उनके मुताबिक तकनीक की मदद से अपराधियों के काम करने के तरीकों की पहचान कर ऐसी actionable intelligence तैयार की जा सकती है, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को समय रहते रोका जा सके।

भगोड़ों को विदेश से वापस लाने पर भी जोर

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ तंत्र को मजबूत किया है। उनके अनुसार 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया है। उन्होंने सभी राज्यों से ऐसा लक्ष्य लेकर काम करने को कहा कि विदेश में मौजूद भगोड़े भी भारतीय कानून की गिरफ्त में आएं।

उन्होंने मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) को अपग्रेड किए जाने का भी जिक्र किया। शाह ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा नीति बनाते समय वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा, सप्लाई चेन में रुकावट, बढ़ते कट्टरपंथ और साइबर मिसइन्फॉर्मेशन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।

तीन न्याय संहिताओं के पूर्ण क्रियान्वयन का लक्ष्य

गृह मंत्री ने कहा कि अगले एक वर्ष में तीनों न्याय संहिताओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे तीन साल के भीतर आपराधिक मामलों के सुप्रीम कोर्ट तक निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और दोषसिद्धि दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

शाह ने कहा कि देश को सुरक्षित, घुसपैठ मुक्त और नारकोटिक्स मुक्त बनाने के लिए चुनौतियों की पहचान उस समय करनी होगी, जब वे बड़ी समस्या का रूप न लें। उनके अनुसार इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से काम करने की जरूरत है।

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