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शराब पीने के बाद उपद्रव क्यों करने लगते हैं लोग? जानें दिमाग पर क्या होता है असर

शराब पीने के बाद कुछ लोग गुस्सैल और उपद्रवी क्यों हो जाते हैं? जानिए शराब का दिमाग, आत्म-नियंत्रण, निर्णय और व्यवहार पर क्या असर पड़ता है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sun, 13 Sep 2026 10:12:51

शराब पीने के बाद उपद्रव क्यों करने लगते हैं लोग? जानें दिमाग पर क्या होता है असर

कई बार आपने देखा होगा कि सामान्य स्थिति में शांत रहने वाला व्यक्ति शराब पीने के बाद बहस करने लगता है, छोटी-सी बात पर गुस्सा हो जाता है या दूसरों से झगड़ने लगता है। कुछ मामलों में नशे की हालत में व्यक्ति ऐसा व्यवहार भी कर बैठता है, जिसका उसे बाद में पछतावा होता है। सवाल यह है कि आखिर शराब पीने के बाद कुछ लोगों के व्यवहार में इतना बदलाव क्यों आ जाता है?

इसका संबंध सिर्फ शराब से मिलने वाले नशे से नहीं, बल्कि उसके दिमाग पर पड़ने वाले असर से भी है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि शराब दिमाग की उन क्षमताओं को प्रभावित करती है जो निर्णय लेने, आवेगों को नियंत्रित करने, खतरे को समझने और भावनाओं को संभालने में मदद करती हैं। यही वजह है कि ज्यादा शराब पीने पर व्यक्ति का व्यवहार असामान्य या नियंत्रण से बाहर हो सकता है।

शराब सबसे पहले दिमाग के नियंत्रण तंत्र को प्रभावित करती है

दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स योजना बनाने, सही-गलत का आकलन करने, निर्णय लेने और अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शराब इस क्षेत्र के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति किसी काम को करने से पहले उसके नतीजे के बारे में उतना नहीं सोच पाता जितना सामान्य स्थिति में सोच सकता है।

National Institute on Alcohol Abuse and Alcoholism के अनुसार शराब निर्णय लेने और impulse control को कमजोर करती है। ज्यादा मात्रा में या कम समय में ज्यादा शराब पीने पर यह असर और गंभीर हो सकता है। प्रतिक्रिया का समय बढ़ सकता है और व्यवहार पर नियंत्रण कम हो सकता है।

यानी नशे में व्यक्ति के सामने कोई ऐसी बात आती है जो उसे गुस्सा दिलाती है, तो वह सामान्य अवस्था की तरह रुककर सोचने या स्थिति से दूर होने के बजाय तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है।

छोटी बात भी बड़ी क्यों लगने लगती है?

शराब से जुड़ी आक्रामकता को समझाने के लिए शोध में Alcohol Myopia Theory का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अनुसार नशे की स्थिति में व्यक्ति का ध्यान सीमित हो सकता है और वह किसी स्थिति में मौजूद सबसे ज्यादा उभरने वाले संकेत पर केंद्रित हो जाता है।

उदाहरण के लिए, किसी पार्टी में किसी व्यक्ति को लगता है कि दूसरे ने उसका अपमान किया है। सामान्य अवस्था में वह उस बात के पीछे की वजह, सामने वाले का इरादा या विवाद के संभावित परिणामों के बारे में सोच सकता है। लेकिन शराब के असर में उसका ध्यान केवल उस कथित अपमान या उकसावे पर टिक सकता है। इससे गुस्से वाली प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ सकती है।

शोध के अनुसार शराब हर स्थिति में आक्रामकता नहीं बढ़ाती। अगर नशे में व्यक्ति का ध्यान किसी शांत करने वाले या गैर-उकसाने वाले संकेत की तरफ चला जाए तो आक्रामक प्रतिक्रिया की संभावना कम भी हो सकती है। इसलिए माहौल और उस समय मौजूद परिस्थितियां काफी महत्वपूर्ण होती हैं।

हर शराब पीने वाला व्यक्ति उपद्रवी नहीं होता

यह समझना भी जरूरी है कि शराब और आक्रामक व्यवहार के बीच संबंध का मतलब यह नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति झगड़ालू हो जाएगा। वैज्ञानिक समीक्षाओं में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल शराब को ही आक्रामकता की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता।

व्यक्ति का स्वभाव, पहले से मौजूद गुस्सा या चिड़चिड़ापन, पिछले हिंसक अनुभव, शराब को लेकर उसकी अपनी अपेक्षाएं और आसपास का माहौल भी असर डालते हैं। जिन लोगों में पहले से impulsive या आक्रामक व्यवहार की प्रवृत्ति होती है, उनमें शराब के बाद नियंत्रण खोने का जोखिम अधिक हो सकता है।

शराब की मात्रा भी महत्वपूर्ण है

शराब का असर उसकी मात्रा और कितनी तेजी से पी गई है, इस पर भी निर्भर करता है। कम समय में ज्यादा शराब पीने से निर्णय लेने की क्षमता, ध्यान, समन्वय और impulse control ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

बहुत ज्यादा शराब पीने पर व्यक्ति को अपनी हालत का अंदाजा भी ठीक से नहीं रह सकता। गंभीर नशे में memory blackout हो सकता है, जिसमें व्यक्ति घटना के दौरान जाग रहा हो सकता है लेकिन बाद में उसे कुछ बातें याद नहीं रहतीं। NIAAA के अनुसार blackout के दौरान भी व्यक्ति पूरी तरह बेहोश जरूरी नहीं होता, लेकिन नई यादें बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

गुस्सा, तनाव और पहले का व्यवहार भी बन सकता है वजह

शराब पीने के बाद किसी व्यक्ति के व्यवहार को समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि वह शराब पीने से पहले किस मानसिक स्थिति में था। अगर कोई व्यक्ति पहले से तनाव, गुस्से, निराशा या किसी विवाद से परेशान है, तो शराब उसके आत्म-नियंत्रण को कमजोर करके उस भावनात्मक स्थिति के असर को बढ़ा सकती है।

शोध में यह भी पाया गया है कि शराब से जुड़ी आक्रामकता में व्यक्ति की पुरानी आदतें और सामाजिक अनुभव भूमिका निभा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने अपने आसपास शराब के बाद झगड़े या हिंसक व्यवहार को सामान्य होते देखा है, तो ऐसी सामाजिक सीख भी उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

शराब दिमाग के खतरे को पहचानने की क्षमता भी प्रभावित कर सकती है

शराब सिर्फ गुस्से या impulse control को ही प्रभावित नहीं करती। यह दिमाग की खतरे को पहचानने और उसका सही आकलन करने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है। NIAAA के अनुसार शराब amygdala जैसे मस्तिष्क क्षेत्र के कामकाज को प्रभावित कर सकती है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया और खतरे को पहचानने में भूमिका निभाता है।

इसी वजह से नशे में व्यक्ति ऐसी स्थिति को कम गंभीर समझ सकता है, जिसमें सामान्य अवस्था में वह पीछे हट जाता। यही कारण है कि शराब के बाद बहस, सड़क पर जोखिम भरा व्यवहार, मारपीट और दूसरी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।

कब स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है?

अगर शराब पीने के बाद कोई व्यक्ति बार-बार दूसरों से लड़ता है, हिंसक हो जाता है, चीजें तोड़ता है, धमकी देता है या बाद में घटनाओं को याद नहीं रख पाता, तो इसे सामान्य नशे का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बहुत ज्यादा शराब पीने की स्थिति में भ्रम, लगातार उल्टी, दौरे, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या व्यक्ति को जगाने में कठिनाई जैसे लक्षण गंभीर alcohol overdose के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

नशे में उपद्रव से बचने के लिए क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को पता है कि शराब पीने के बाद उसका व्यवहार आक्रामक हो जाता है, तो सबसे सुरक्षित कदम शराब से दूरी बनाना या सेवन कम करना है। नशे की स्थिति में बहस या टकराव वाली जगह से दूर रहना भी जोखिम कम कर सकता है।

साथ ही, नशे में वाहन चलाना बिल्कुल नहीं चाहिए। शराब निर्णय लेने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जबकि व्यक्ति को खुद अपनी हालत उतनी खराब महसूस नहीं हो सकती। कॉफी पीने या थोड़ी देर आराम करने से शराब का असर तुरंत खत्म नहीं होता। शरीर को alcohol metabolize करने के लिए समय चाहिए।

कुल मिलाकर, शराब किसी व्यक्ति को अचानक पूरी तरह दूसरा इंसान नहीं बना देती। बल्कि यह दिमाग के नियंत्रण, निर्णय और ध्यान से जुड़े तंत्र को प्रभावित कर सकती है। जब इसके साथ गुस्सा, उकसावा, तनाव, व्यक्ति का स्वभाव और माहौल जुड़ जाते हैं, तो कुछ लोगों में आक्रामक या उपद्रवी व्यवहार की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए शराब के बाद होने वाले झगड़े को केवल “नशे में था इसलिए ऐसा हुआ” कहकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।

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