बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी 65 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस के लिए चर्चा में रहते हैं। अगस्त 2026 में अपने 65वें जन्मदिन के मौके पर उनकी एक पुरानी बातचीत फिर चर्चा में आई, जिसमें उन्होंने बताया था कि शरीर की कुछ समस्याओं के बाद उन्होंने अपनी डाइट में बड़े बदलाव किए। जांच के बाद उन्हें पता चला कि ग्लूटेन और डेयरी प्रोडक्ट्स उनके शरीर को सूट नहीं करते।
सुनील शेट्टी ने बताया था कि उन्हें लंबे समय तक शाम के समय सिरदर्द की समस्या रहती थी। बाद में उन्होंने अपनी डाइट और शरीर के संकेतों पर ध्यान दिया और समझ आया कि समस्या का संबंध उनके पेट और खान-पान से हो सकता है। एलर्जी टेस्ट के बाद उन्हें ग्लूटेन से समस्या होने का पता चला। इसके बाद उन्होंने ग्लूटेन वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी शुरू की।
ग्लूटेन से बनाई दूरी
अभिनेता के मुताबिक, ग्लूटेन उनके लिए सही नहीं था। उन्होंने बताया था कि उनके खाने में चावल की भूमिका ज्यादा रही है और वह गेहूं की तुलना में चावल को अधिक आसानी से पचा पाते हैं। इसलिए उनके कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोतों में चावल शामिल रहा है।
यहां यह समझना जरूरी है कि ग्लूटेन से दूरी सुनील शेट्टी की व्यक्तिगत जरूरत से जुड़ी है। इसे हर व्यक्ति के लिए जरूरी डाइट नियम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
डेयरी से भी परेशानी
ग्लूटेन के बाद सुनील शेट्टी को डेयरी से जुड़ी समस्या का भी पता चला। उन्होंने बताया था कि डेयरी में मौजूद lactose उनके शरीर को ठीक से सूट नहीं करता। हालांकि उन्होंने डेयरी को पूरी तरह छोड़ने के बजाय lactose-free milk का विकल्प अपनाया।
यानी हेडलाइन में इस्तेमाल “दो चीजें छोड़ने” का मतलब पूरी तरह हर तरह की डेयरी को बंद करना नहीं है। उनकी डाइट में बदलाव मुख्य रूप से ग्लूटेन से बचने और सामान्य डेयरी की जगह शरीर के अनुकूल विकल्प अपनाने से जुड़ा है।
प्रोटीन पर रहता है फोकस
सुनील शेट्टी की डाइट में प्रोटीन की अहम भूमिका है। उन्होंने अपनी एक बातचीत में बताया था कि वह नाश्ते में अंडे की सफेदी लेते हैं और दिन के दूसरे भोजन में मछली या चिकन जैसे प्रोटीन स्रोत शामिल करते हैं। उनकी डाइट का फोकस मात्रा को नियंत्रित रखने और शरीर की जरूरत के अनुसार खाना खाने पर रहता है।
उन्होंने यह भी बताया है कि वह अपने खान-पान को लेकर न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि कौन-सा भोजन उनके शरीर के लिए बेहतर है।
कैलोरी और पोर्शन पर भी नजर
सुनील शेट्टी ने अपनी डाइट के बारे में बताते हुए कैलोरी और खाने की मात्रा को नियंत्रित रखने की बात कही थी। अलग-अलग दिनों में उनकी कैलोरी जरूरत गतिविधि के हिसाब से बदलती है और रिपोर्टों में उनका दैनिक सेवन लगभग 1,600 से 1,900 कैलोरी के बीच बताया गया है। वह पूरी तरह से स्वादिष्ट चीजों से दूरी बनाने के बजाय पोर्शन कंट्रोल पर जोर देते हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि उन्हें मिठाई पसंद है और वह इसे पूरी तरह छोड़ने के बजाय मात्रा को नियंत्रित रखते हैं।
रात का खाना जल्दी खत्म करने की आदत
सुनील शेट्टी की दिनचर्या में जल्दी डिनर करना भी शामिल है। उन्होंने बताया था कि वह आमतौर पर रात का खाना करीब 7 बजे तक खत्म कर लेते हैं। इसके बाद भी वह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं रहते और खाना खाने के बाद पैदल चलने जैसी गतिविधियां करते हैं। उनकी रोजमर्रा की गतिविधि सिर्फ जिम तक सीमित नहीं है। वह सीढ़ियां चढ़ने, खाने के बाद चलने और काम के दौरान लगातार सक्रिय रहने को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बताते हैं।
वर्कआउट में स्ट्रेंथ और मोबिलिटी पर जोर
सुनील शेट्टी के लिए उम्र बढ़ने के साथ फिटनेस का मतलब सिर्फ मसल्स बनाना नहीं रह गया है। उनकी ट्रेनिंग में स्ट्रेंथ के साथ मोबिलिटी और शरीर को सक्रिय बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वह सप्ताह में करीब छह दिन लगभग 45 मिनट ट्रेनिंग करते हैं।
2026 में India Today Conclave के दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस को “boringly consistent” अनुशासन से जोड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि वह सप्लीमेंट्स पर निर्भर नहीं रहते और घर का बना खाना, पर्याप्त नींद तथा नियमित व्यायाम उनकी दिनचर्या के अहम हिस्से हैं।
योग और प्राणायाम भी रूटीन का हिस्सा
सुनील शेट्टी ने 2026 में योग के बारे में बात करते हुए कहा था कि योग ने उन्हें अपने शरीर को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। उन्होंने प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने की बात कही है।
उनका फिटनेस रूटीन किसी एक डाइट या एक्सरसाइज पर आधारित नहीं है। उनकी बताई दिनचर्या में शरीर को सूट करने वाला भोजन, प्रोटीन, पोर्शन कंट्रोल, नियमित ट्रेनिंग, पर्याप्त आराम और पूरे दिन सक्रिय रहने जैसी आदतें शामिल हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ग्लूटेन या डेयरी से दूरी सुनील शेट्टी के अपने अनुभव और उनकी बताई स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर आधारित है। हर व्यक्ति की डाइट और पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ने का फैसला व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।













