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पेस्टिसाइड्स के लगातार संपर्क से कैंसर का खतरा हो सकता है 150% तक ज्यादा, नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में खुलासा हुआ है कि पेस्टिसाइड्स के लगातार संपर्क से कैंसर का खतरा 150% तक बढ़ सकता है। रिसर्च में बताया गया है कि कई रसायनों का संयुक्त प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 30 Apr 2026 9:00:53

पेस्टिसाइड्स के लगातार संपर्क से कैंसर का खतरा हो सकता है 150% तक ज्यादा, नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

हमारे रोजमर्रा के जीवन में हम जिस भोजन का सेवन करते हैं, जिस पानी को पीते हैं और जिस हवा में सांस लेते हैं, उसमें कई प्रकार के रासायनिक तत्व मौजूद हो सकते हैं। इन्हीं में एक प्रमुख समूह है कीटनाशक यानी पेस्टिसाइड्स, जिनका इस्तेमाल खेती में फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।

हाल ही में सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस विषय को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में दावा किया गया है कि जिन क्षेत्रों में पेस्टिसाइड्स का अधिक उपयोग होता है, वहां रहने वाले लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा लगभग 150 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यह निष्कर्ष पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर रसायनों के प्रभाव को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

नई रिसर्च में क्या सामने आया?

यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Nature Health में प्रकाशित हुआ है। इसमें पहली बार इस बात पर ध्यान दिया गया है कि लोग केवल एक नहीं, बल्कि एक साथ कई पेस्टिसाइड्स के संपर्क में रहते हैं। पहले की रिसर्च आमतौर पर एक-एक केमिकल पर आधारित होती थीं, लेकिन वास्तविक जीवन में हम “मिक्स्ड एक्सपोजर” यानी कई रसायनों के संयुक्त प्रभाव में रहते हैं। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए यह नया विश्लेषण किया गया है, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने दक्षिण अमेरिकी देश पेरू को चुना।

पेरू को क्यों चुना गया अध्ययन के लिए?

पेरू में कृषि गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं और यहां अलग-अलग भौगोलिक व पर्यावरणीय क्षेत्र पाए जाते हैं। इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक असमानताएं भी अधिक हैं, जिसके कारण यह अध्ययन के लिए एक उपयुक्त स्थान माना गया। रिसर्च में पाया गया कि ग्रामीण और आदिवासी समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई इलाकों में लोगों पर एक साथ लगभग 12 अलग-अलग पेस्टिसाइड्स का असर देखा गया, जिनकी मात्रा कई जगहों पर चिंताजनक रूप से अधिक थी।

रिसर्च कैसे की गई?

वैज्ञानिकों ने कुल 31 सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाले पेस्टिसाइड्स का विश्लेषण किया। 2014 से 2019 तक इन रसायनों के प्रसार और उपयोग पर निगरानी रखी गई, जबकि 2007 से 2020 के बीच 1.5 लाख से अधिक कैंसर मरीजों के स्वास्थ्य आंकड़ों का अध्ययन किया गया। परिणामों में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में पेस्टिसाइड्स का स्तर अधिक था, वहां कैंसर के मामले भी ज्यादा दर्ज किए गए। खास बात यह है कि इनमें से कई रसायनों को अभी तक WHO द्वारा कैंसर पैदा करने वाले के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है, लेकिन इनके संयुक्त प्रभाव को खतरनाक पाया गया है।

शरीर पर कैसे असर डालते हैं पेस्टिसाइड्स?

अध्ययन के अनुसार, पेस्टिसाइड्स का असर शरीर पर धीरे-धीरे और लंबे समय में दिखाई देता है। ये रसायन कोशिकाओं के सामान्य कार्य में बाधा डाल सकते हैं और समय के साथ इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकते हैं। सबसे ज्यादा असर लिवर पर देखा गया है। चूंकि ये बदलाव तुरंत स्पष्ट नहीं होते, इसलिए लोग इनके खतरे को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि लंबे समय में ये गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

अध्ययन में और क्या महत्वपूर्ण बातें सामने आईं?

रिसर्च यह भी संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन, जैसे कि एल नीनो (El Niño), पेस्टिसाइड्स के उपयोग और उनके फैलाव को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पर्यावरण में इन रसायनों की मौजूदगी और बढ़ सकती है। हालांकि यह अध्ययन पेरू पर आधारित है, लेकिन इसके निष्कर्ष वैश्विक स्तर पर भी लागू हो सकते हैं क्योंकि दुनिया के कई देशों में खेती के लिए पेस्टिसाइड्स का व्यापक उपयोग होता है। हर देश में नियम और निगरानी व्यवस्था अलग-अलग होने के कारण यह एक संभावित वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर सकता है।

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