आजकल की व्यस्त दिनचर्या में खान-पान की अनियमित आदतें और लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना पेट से जुड़ी परेशानियों की वजह बन सकता है। गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं रोजमर्रा के कामों को भी असहज बना सकती हैं। ऐसी स्थिति में योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। पवनमुक्तासन ऐसा ही एक योगासन है, जिसका अभ्यास पेट के आसपास दबाव पैदा करता है और गैस निकलने में मदद कर सकता है। पवनमुक्तासन का नाम संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है। 'पवन' का अर्थ हवा, 'मुक्त' का अर्थ छोड़ना और 'आसन' का अर्थ योग की मुद्रा होता है। इसी वजह से इसे अंग्रेजी में 'विंड-रिलीविंग पोज' भी कहा जाता है। इसे वायु मुक्ति आसन या गैस रिलीज पोज के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन का संबंध पेट में जमा गैस से राहत पाने के अभ्यास से है। हालांकि, इसे अपच या पाचन संबंधी किसी बीमारी का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए।
1. पेट में गैस से राहत पाने में मददगार
पेट में गैस बनने पर कई बार भारीपन और असहजता महसूस होती है। पवनमुक्तासन में शरीर की मुद्रा के कारण पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है। इससे कुछ लोगों को गैस निकलने में मदद मिल सकती है और पेट का भारीपन कम महसूस हो सकता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, पवनमुक्तासन को वात से राहत और पेट के बढ़ने से बचाव से भी जोड़ा गया है। हालांकि, गैस और पेट फूलने की समस्या के पीछे खान-पान, पाचन संबंधी परेशानी या दूसरी वजहें हो सकती हैं। इसलिए बार-बार समस्या होने पर केवल योगासन पर निर्भर रहने के बजाय उसके कारण को समझना जरूरी है।
2. पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में सहायक
पवनमुक्तासन करते समय पेट के हिस्से पर दबाव पड़ता है। इसी वजह से इसे पाचन क्रिया में सहायक माने जाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है। नियमित और सही तरीके से किया गया योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि केवल इस आसन को करने से पाचन तंत्र की हर समस्या दूर हो जाती है। अगर आपको लगातार अपच, पेट में दर्द या असामान्य रूप से पेट फूलने की परेशानी रहती है, तो इसकी वजह जानने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
3. पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों के लिए उपयोगी
पवनमुक्तासन का संबंध केवल पेट तक सीमित नहीं है। इस मुद्रा में शरीर के निचले हिस्से पर भी प्रभाव पड़ता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों, लिगामेंट्स और टेंडन्स के लिए लाभकारी माना जाता है। पेल्विक क्षेत्र शरीर के संतुलन और कई शारीरिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योगाभ्यास के दौरान इस हिस्से की स्थिति और मांसपेशियों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, पवनमुक्तासन से इन सभी ऊतकों की ताकत बढ़ने या किसी विशेष समस्या के ठीक होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
4. पेट, कमर और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों पर असर
पेट, कमर और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियां शरीर को स्थिर रखने और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती हैं। पवनमुक्तासन में इन हिस्सों की भागीदारी होती है, इसलिए इसे शरीर के मध्य भाग यानी कोर से जुड़ा योगासन भी माना जाता है। नियमित योगाभ्यास शरीर की गतिशीलता और शारीरिक जागरूकता बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस आसन को करने मात्र से कोर मांसपेशियां मजबूत होने, थकान कम होने या शरीर का संतुलन बेहतर होने का निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
5. महिलाओं के लिए पेल्विक स्वास्थ्य से जुड़ा पहलू
पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियां महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पवनमुक्तासन को इस हिस्से से संबंधित योगासनों में गिना जाता है। मूल लेख में इसे पेल्विक क्षेत्र की ताकत और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों के संदर्भ में उपयोगी बताया गया है।
हालांकि, मासिक धर्म के दौरान दर्द या दूसरी परेशानियों में इस आसन से राहत मिलने के पर्याप्त प्रमाण यहां उपलब्ध नहीं हैं। हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए इसे मासिक धर्म संबंधी समस्याओं का निश्चित उपचार नहीं समझना चाहिए।
पवनमुक्तासन करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें?
पवनमुक्तासन का अभ्यास करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। अगर पेट, कमर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी है या हाल ही में सर्जरी हुई है, तो इस आसन से बचें। ऐसी स्थिति में दोबारा योग शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।
गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए। वहीं, उच्च रक्तचाप या हर्निया की समस्या से जूझ रहे लोगों को अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर किसी भी मुद्रा में दर्द या असहजता महसूस हो, तो उसे जबरदस्ती जारी न रखें।













