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सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, ये कारण भी घटा सकते हैं स्पर्म काउंट; पिता बनने की राह हो सकती है मुश्किल

सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, मोटापा, तनाव, शराब, हार्मोनल असंतुलन और कुछ बीमारियां भी स्पर्म काउंट कम कर सकती हैं। जानें लो स्पर्म काउंट के कारण, लक्षण, इलाज और पिता बनने की संभावना बढ़ाने के उपाय।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 04 Jul 2026 9:18:36

सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, ये कारण भी घटा सकते हैं स्पर्म काउंट; पिता बनने की राह हो सकती है मुश्किल

आज के समय में पुरुषों में कम स्पर्म काउंट (Low Sperm Count) की समस्या पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि इसका मुख्य कारण केवल सिगरेट, तंबाकू या धूम्रपान है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी और जीवनशैली से जुड़े कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। यदि इन कारणों की समय रहते पहचान और उपचार न किया जाए, तो पुरुषों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और प्राकृतिक रूप से पिता बनने में कठिनाई आ सकती है। आइए जानते हैं कि किन वजहों से स्पर्म काउंट कम होता है और इससे जुड़े महत्वपूर्ण संकेत क्या हैं।

कब कहा जाता है स्पर्म काउंट कम?

जब पुरुष के वीर्य (Semen) में मौजूद शुक्राणुओं (Sperm) की संख्या सामान्य स्तर से नीचे चली जाती है, तो इस स्थिति को लो स्पर्म काउंट या ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) कहा जाता है। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट Mayo Clinic के अनुसार, यदि एक मिलीलीटर वीर्य में 1.5 करोड़ (15 मिलियन) से कम शुक्राणु मौजूद हों, तो इसे सामान्य से कम स्पर्म काउंट माना जाता है। वहीं यदि वीर्य में बिल्कुल भी शुक्राणु मौजूद न हों, तो इस स्थिति को एजूस्पर्मिया (Azoospermia) कहा जाता है। ऐसी अवस्था में बिना चिकित्सकीय सहायता के गर्भधारण की संभावना काफी कम हो सकती है।

किन लक्षणों से मिल सकता है संकेत?

कम स्पर्म काउंट का सबसे सामान्य संकेत यह होता है कि लंबे समय तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। कई पुरुषों में इसके अलावा कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए समस्या लंबे समय तक छिपी रह सकती है।

हालांकि कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यौन इच्छा में कमी, इरेक्शन से जुड़ी परेशानी, अंडकोष (टेस्टिकल) में दर्द, सूजन, गांठ या असहजता जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। यदि ऐसे संकेत दिखाई दें, तो विशेषज्ञ से जांच कराना उचित माना जाता है।

सिर्फ तंबाकू नहीं, कई अन्य कारण भी हैं जिम्मेदार

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पर्म काउंट कम होने के पीछे केवल धूम्रपान या तंबाकू का सेवन ही जिम्मेदार नहीं होता। बढ़ता मोटापा, लगातार मानसिक तनाव, अत्यधिक शराब का सेवन, नशीले पदार्थों का उपयोग और हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां भी शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

इसके अलावा कुछ संक्रमण (Infections), वैरिकोसील (Varicocele) जैसी समस्या, थायरॉयड संबंधी बीमारियां तथा लंबे समय तक कुछ विशेष दवाओं का सेवन भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि एक वर्ष तक बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के नियमित संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न हो, तो पुरुष और महिला दोनों को चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। वहीं जिन लोगों को पहले से अंडकोष, प्रोस्टेट या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या रही हो, उन्हें जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर कारण का पता चलने से उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।

क्या लो स्पर्म काउंट का इलाज संभव है?


कम स्पर्म काउंट का मतलब हर बार बांझपन (Infertility) नहीं होता। आधुनिक चिकित्सा में ऐसी कई दवाएं, उपचार पद्धतियां और फर्टिलिटी तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है। कई मामलों में केवल जीवनशैली में सुधार करने से भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित और पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तनाव को नियंत्रित करना, पर्याप्त नींद लेना और धूम्रपान, तंबाकू व अत्यधिक शराब से दूरी बनाना स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता दोनों में सुधार लाने में मददगार साबित हो सकता है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो स्वयं इलाज करने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर उचित जांच और उपचार शुरू करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

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