अगर रात में डरावना सपना देखकर अचानक नींद खुल जाए और उसके बाद ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा मिले, तो इसके पीछे शरीर की तनाव प्रतिक्रिया एक वजह हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, किसी बुरे सपने के दौरान शरीर उसे वास्तविक खतरे की तरह महसूस कर सकता है। इससे तनाव से जुड़े हार्मोन सक्रिय होते हैं और कुछ समय के लिए ब्लड ग्लूकोज बढ़ सकता है।
डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा के अनुसार, डरावने सपने के दौरान शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। एड्रेनालिन शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है और लिवर में जमा ग्लूकोज को रक्त में छोड़ने का संकेत देता है। वहीं कॉर्टिसोल ग्लूकोज बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता को कुछ समय के लिए कम कर सकता है। इसका नतीजा ब्लड शुगर में अस्थायी बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है।
डरावने सपने में शरीर में क्या होता है?
Nightmare के दौरान शरीर की ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम गतिविधि बढ़ सकती है। शोध में पाया गया है कि डरावने सपने के दौरान हृदय गति और दूसरी शारीरिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव हो सकता है। यानी व्यक्ति भले ही बिस्तर पर सो रहा हो, लेकिन शरीर कुछ समय के लिए तनाव या खतरे की स्थिति जैसी प्रतिक्रिया दे सकता है।
इसी तनाव प्रतिक्रिया के कारण लिवर से ग्लूकोज रक्त में पहुंच सकता है। इसके साथ कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन ग्लूकोज नियंत्रण को प्रभावित कर सकते हैं। डायबिटीज या प्री-डायबिटीज वाले लोगों में यह बदलाव अपेक्षाकृत ज्यादा स्पष्ट या लंबे समय तक दिखाई दे सकता है, क्योंकि उनके शरीर में ग्लूकोज को नियंत्रित करने की क्षमता पहले से प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एक बार डरावना सपना देखने से किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाएगी या उसकी ब्लड शुगर स्थायी रूप से बढ़ जाएगी। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से तनाव प्रतिक्रिया और अस्थायी ग्लूकोज उतार-चढ़ाव की ओर इशारा करती है।
एक जरूरी उल्टा कनेक्शन भी समझें
ब्लड शुगर और डरावने सपनों के बीच संबंध हमेशा ऐसा नहीं होता कि सपना पहले आया और शुगर बढ़ गई। कुछ लोगों में इसका उल्टा भी हो सकता है। खासकर डायबिटीज का इलाज कराने वाले ऐसे लोगों में जिनका रात के समय ब्लड शुगर बहुत कम हो जाता है, हाइपोग्लाइसीमिया के दौरान डरावने सपने, बेचैनी, पसीना या नींद से अचानक जागना हो सकता है। अमेरिकी NIDDK भी रात के समय लो ब्लड ग्लूकोज के लक्षणों में nightmares को शामिल करता है।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार डरावने सपने आते हैं और वह डायबिटीज की दवा या इंसुलिन ले रहा है, तो केवल सपने को तनाव का नतीजा मानना सही नहीं होगा। रात में ब्लड शुगर के बहुत कम होने की संभावना भी चिकित्सकीय रूप से देखी जा सकती है।
बार-बार Nightmare और डायबिटीज के बीच क्या संबंध मिला?
सितंबर 2026 में प्रकाशित एक जनसंख्या-आधारित अध्ययन में लगातार आने वाले nightmares और कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों के बीच संबंध की जांच की गई। स्विट्जरलैंड के CoLaus|PsyCoLaus अध्ययन के तीन फॉलो-अप में हजारों प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने frequent nightmares वाले लोगों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की अधिक मौजूदगी देखी।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने इसे कारण और प्रभाव का पक्का प्रमाण नहीं माना है। अध्ययन में frequent nightmares और कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों के बीच संबंध मिला, लेकिन इसके पीछे का तंत्र अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अध्ययन में सलाइवरी कॉर्टिसोल के स्तर में nightmares और बिना nightmares वाले समूहों के बीच स्पष्ट अंतर भी नहीं मिला। इसलिए केवल इस अध्ययन के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि डरावने सपने सीधे डायबिटीज का कारण बनते हैं।
कुल मिलाकर, डरावना सपना आने पर शरीर की तनाव प्रतिक्रिया कुछ समय के लिए ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है। लेकिन रात में बार-बार nightmares होने की स्थिति में ब्लड शुगर के कम होने की संभावना समेत दूसरे कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी व्यक्ति में रात के समय ग्लूकोज में लगातार असामान्य उतार-चढ़ाव हो रहा हो, तो उसके कारण की जांच चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना उचित है।














