कई लोगों की सुबह आंख खुलते ही छींक आने, नाक में खुजली होने और नाक बहने जैसी परेशानियों के साथ शुरू होती है। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर हर दिन बिस्तर से उठते ही लगातार छींकें आने लगें, तो इसकी वजह समझना जरूरी है। अक्सर इसके पीछे एलर्जी या आसपास मौजूद धूल, फफूंद और दूसरी चीजें जिम्मेदार हो सकती हैं। कुछ लोगों में मौसम में बदलाव या हवा में मौजूद जलन पैदा करने वाले कण भी नाक को प्रभावित करते हैं। अच्छी बात यह है कि कारण को पहचानकर और रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करके इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।
सुबह उठते ही ज्यादा छींकें क्यों आती हैं?
सुबह लगातार छींक आने की एक आम वजह एलर्जिक राइनाइटिस हो सकती है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर धूल, परागकण या कुछ अन्य पदार्थों के संपर्क में आने पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करता है। इसके कारण नाक में खुजली, छींकें, नाक बहना और नाक बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। रातभर सोते समय हमारा चेहरा तकिए और गद्दे के काफी करीब रहता है। बिस्तर, गद्दे और तकिए में डस्ट माइट्स यानी धूल में पाए जाने वाले बेहद छोटे जीव मौजूद हो सकते हैं। ये गर्म और नमी वाली जगहों में पनपते हैं और त्वचा की मृत कोशिकाओं पर निर्भर रहते हैं। इनके छोटे कणों के संपर्क में आने से संवेदनशील लोगों में एलर्जी के लक्षण बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों को रात में सोते समय या सुबह उठते ही छींकें आने लगती हैं।
ध्यान रखें कि डस्ट माइट्स का घर में मौजूद होना जरूरी नहीं कि गंदगी का संकेत हो। साफ-सुथरे घरों में भी ये पाए जा सकते हैं। इनके अलावा पालतू जानवरों से निकलने वाले एलर्जन, फफूंद और सुबह की ठंडी हवा भी कुछ लोगों की नाक को प्रभावित कर सकती है।
कौन-सी चीजें सुबह की छींक और नाक बहने की परेशानी बढ़ाती हैं?
हर बार सुबह छींक आने की वजह एलर्जी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को नॉन-एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या होती है। इसमें नाक की अंदरूनी परत मौसम में बदलाव, तेज गंध, धुएं या प्रदूषण जैसे कारकों के प्रति संवेदनशील हो जाती है। इनके संपर्क में आने पर छींकें आने, नाक बहने या बंद होने की परेशानी हो सकती है। कमरे में हवा बहुत सूखी होने पर भी नाक के अंदर की परत में सूखापन और जलन महसूस हो सकती है। इससे कुछ लोगों को छींक आने लगती है। मौसम बदलने के दौरान तापमान और हवा की नमी में होने वाले बदलाव भी लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
कुछ मामलों में एसिड रिफ्लक्स यानी पेट का एसिड ऊपर की ओर आने की समस्या भी सुबह गले में जलन, खराश या नाक से जुड़ी परेशानी के साथ हो सकती है। हालांकि, केवल छींक आने से एसिड रिफ्लक्स को इसकी वजह नहीं माना जा सकता। लक्षणों पर ध्यान देने से कारण का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है। अगर छींक के साथ आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना, नाक बहना या नाक बंद रहने की परेशानी है, तो एलर्जी की संभावना हो सकती है। दूसरी ओर, छींक के साथ बुखार, बदन दर्द और गले में दर्द भी हो, तो सर्दी-जुकाम जैसे वायरल संक्रमण पर विचार किया जा सकता है।
सुबह की छींक से राहत पाने के लिए क्या करें?
1. चादर और तकिए के कवर नियमित रूप से धोएं
अगर सुबह उठते ही छींकें आती हैं, तो बिस्तर की सफाई पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। चादर और तकिए के कवर को सप्ताह में एक बार गर्म पानी में धोएं। इससे बिस्तर पर जमा धूल और कुछ एलर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। पुराने तकियों को हर एक से दो साल में बदलने पर भी विचार करें, खासकर अगर उनमें धूल जमा हो रही हो या उन्हें साफ रखना मुश्किल हो। तकिए और गद्दे की नियमित देखभाल करने से धूल के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है।
2. कमरे की सफाई गीले कपड़े से करें
कमरे में धूल जमा होने से एलर्जी के लक्षण बढ़ सकते हैं। सफाई करते समय सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े का इस्तेमाल करें। इससे धूल के कण हवा में उड़ने के बजाय कपड़े पर जमा हो सकते हैं। बिस्तर के आसपास, फर्नीचर और उन जगहों की नियमित सफाई करें जहां धूल आसानी से इकट्ठा होती है। अगर सफाई के दौरान ही छींकें बढ़ने लगती हैं, तो धूल के संपर्क पर विशेष ध्यान दें।
3. पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखें
अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं और सुबह छींक आने की परेशानी बनी रहती है, तो उन्हें बेडरूम से दूर रखने की कोशिश करें। पालतू जानवरों की त्वचा से निकलने वाले छोटे कण और अन्य एलर्जन बिस्तर या कमरे की सतहों पर जमा हो सकते हैं। सोने की जगह पर इनका संपर्क कम करने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। हालांकि, अगर छींक आने की वजह कोई दूसरा एलर्जन या नॉन-एलर्जिक राइनाइटिस है, तो केवल यह बदलाव पर्याप्त नहीं होगा।
4. सुबह की हवा और कमरे के वातावरण पर ध्यान दें
कुछ लोगों को सुबह की ठंडी हवा, धूल या बाहर मौजूद प्रदूषण के संपर्क में आने से छींकें बढ़ जाती हैं। अगर आपको ऐसा महसूस होता है, तो सुबह कमरे की खिड़कियां बंद रखने पर विचार करें, खासकर जब बाहर की हवा से लक्षण बढ़ते हों। जरूरत पड़ने पर एयर फिल्टर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, इससे मिलने वाला लाभ कमरे की स्थिति और परेशानी की वजह पर निर्भर करेगा। अगर कमरे की हवा बहुत सूखी है, तो वातावरण में नमी का स्तर भी ध्यान में रखें।
सुबह छींक आने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर कई हफ्तों से हर सुबह लगातार छींकें आ रही हैं, नाक बहने की परेशानी बनी रहती है या इसके कारण आपकी नींद प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें। इसी तरह, सांस लेने में तकलीफ या सीने में घरघराहट होने पर भी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
लक्षणों की अवधि, उनकी गंभीरता और किन परिस्थितियों में वे बढ़ते हैं, इन बातों के आधार पर डॉक्टर संभावित कारण का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के एलर्जी या छींक रोकने की दवाएं लेने से बचें, क्योंकि सही उपचार परेशानी की वजह और आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।














