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सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को जिम्मेदार मानना पड़ सकता है भारी, हार्ट डिजीज के इन खतरों पर भी दें ध्यान

हार्ट डिजीज का खतरा सिर्फ हाई कोलेस्ट्रॉल से नहीं बढ़ता। जानें ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, धूम्रपान और अन्य जोखिम कारकों पर ध्यान क्यों जरूरी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 14 Sep 2026 5:33:42

सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को जिम्मेदार मानना पड़ सकता है भारी, हार्ट डिजीज के इन खतरों पर भी दें ध्यान

हार्ट डिजीज का खतरा केवल हाई कोलेस्ट्रॉल से तय नहीं होता। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, धूम्रपान, अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और खान-पान जैसे कई दूसरे कारक भी दिल और रक्त वाहिकाओं की सेहत को प्रभावित करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज, असामान्य ब्लड लिपिड और मोटापा हृदय रोग के प्रमुख मेटाबॉलिक जोखिम कारकों में शामिल हैं।

हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज न करें

ब्लड प्रेशर लगातार ज्यादा रहने पर हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है और रक्त वाहिकाओं पर भी दबाव बढ़ता है। WHO के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में से एक है। भारत में भी इसे लेकर चिंता है। WHO India के मुताबिक देश में अनुमानित 22 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से प्रभावित हैं, जबकि केवल करीब 12 प्रतिशत लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है।

हाई ब्लड प्रेशर के साथ अगर मोटापा, धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज भी मौजूद हो, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम और बढ़ सकता है।

ब्लड शुगर भी दिल के लिए महत्वपूर्ण

डायबिटीज को भी हार्ट डिजीज के प्रमुख नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में माना जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का जोखिम बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और अधिक वजन जैसी स्थितियां डायबिटीज के साथ मिलकर जोखिम को और बढ़ा सकती हैं।

इसलिए केवल लिपिड प्रोफाइल सामान्य आने को दिल की पूरी सुरक्षा का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर जैसे दूसरे महत्वपूर्ण मापदंडों पर भी ध्यान देना जरूरी है। AHA के अनुसार प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और अधिक वजन एक साथ पाए जा सकते हैं और ये सभी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

धूम्रपान और कम शारीरिक गतिविधि भी बड़े खतरे

तंबाकू का इस्तेमाल हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल है। इसी तरह शारीरिक गतिविधि की कमी भी हृदय रोग के खतरे को बढ़ाती है। WHO के अनुसार अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और हानिकारक मात्रा में शराब का सेवन ऐसे प्रमुख व्यवहार हैं जो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ी हुई ब्लड शुगर, असामान्य ब्लड लिपिड और मोटापे जैसी स्थितियों से जुड़े हैं।

अधिक वजन और मोटापा भी अलग से ध्यान देने योग्य कारक हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार मोटापा हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा है और इंसुलिन रेजिस्टेंस के साथ भी इसका संबंध है।

सिर्फ LDL नहीं, पूरी लिपिड प्रोफाइल पर ध्यान

इसका मतलब यह नहीं है कि कोलेस्ट्रॉल महत्वहीन है। LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा स्तर हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा है और इसे नियंत्रित करना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन आधुनिक जोखिम आकलन में केवल LDL को अलग से देखने के बजाय दूसरे कारकों को भी शामिल किया जाता है।

2026 की AHA/ACC डिस्लिपिडेमिया गाइडलाइन में LDL-C के अलावा ट्राइग्लिसराइड-रिच रेमनेंट पार्टिकल्स और लिपोप्रोटीन(a) जैसे दूसरे लिपिड-संबंधी जोखिमों पर भी ध्यान दिया गया है। गाइडलाइन में जरूरत के अनुसार Lp(a) की कम से कम एक बार जांच और कुछ लोगों में ApoB की जांच को जोखिम आकलन बेहतर करने के लिए शामिल किया गया है।

हार्ट हेल्थ के लिए किन चीजों पर नजर रखें?

2026 में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ओर से बताए गए PREVENT जोखिम आकलन में उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी फंक्शन, डायबिटीज और धूम्रपान जैसी जानकारी का इस्तेमाल हृदय रोग, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि कार्डियोवैस्कुलर जोखिम किसी एक टेस्ट या एक नंबर से तय नहीं होता।

इसलिए हार्ट डिजीज से बचाव के लिए केवल कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन, धूम्रपान की आदत, शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार दूसरे जोखिम कारकों की भी नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निगरानी जरूरी है।

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