ब्लड प्रेशर चेक करते समय अगर मशीन पर 145/70 mmHg की रीडिंग आती है तो अक्सर लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। नीचे का आंकड़ा सामान्य दिखाई देता है, लेकिन ऊपर का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 145/70 को हाई ब्लड प्रेशर माना जाएगा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बार की रीडिंग से किसी व्यक्ति को हाइपरटेंशन का मरीज नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन अगर सिस्टोलिक यानी ऊपर का दबाव बार-बार 140 mmHg या उससे ज्यादा आ रहा है तो इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। लगातार बढ़ा हुआ सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर लंबे समय तक दबाव डाल सकता है।
145/70 में कौन सा नंबर ज्यादा महत्वपूर्ण है?
ब्लड प्रेशर की रीडिंग में पहला नंबर सिस्टोलिक और दूसरा डायस्टोलिक प्रेशर बताता है। सिस्टोलिक दबाव उस समय का दबाव होता है जब दिल धड़ककर रक्त को शरीर में भेजता है, जबकि डायस्टोलिक दबाव दिल की धड़कनों के बीच का दबाव दर्शाता है।
145/70 में डायस्टोलिक संख्या 70 है, जो सामान्य सीमा में हो सकती है, लेकिन 145 का सिस्टोलिक स्तर बढ़ा हुआ है। इस स्थिति को कई मामलों में आइसोलेटेड सिस्टोलिक हाइपरटेंशन कहा जाता है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखने को मिल सकती है, हालांकि युवा लोगों में भी ऐसी रीडिंग आ सकती है।
क्या एक बार 145/70 आने पर घबराना चाहिए?
जरूरी नहीं। ब्लड प्रेशर पर तनाव, कैफीन, व्यायाम, नींद की कमी और रीडिंग लेने का तरीका भी असर डाल सकता है। इसलिए एक अकेली रीडिंग के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
बेहतर है कि कुछ दिनों तक सही तरीके से ब्लड प्रेशर मापा जाए और रीडिंग को नोट किया जाए। अगर ऊपर का दबाव लगातार बढ़ा हुआ मिल रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
लगातार हाई सिस्टोलिक BP से क्या खतरा है?
लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इससे भविष्य में हृदय रोग और स्ट्रोक जैसे हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसलिए सिर्फ इसलिए कि नीचे का नंबर सामान्य है, ऊपर के बढ़े हुए नंबर को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?
नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, नमक की मात्रा पर नियंत्रण, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी ब्लड प्रेशर नियंत्रण में मदद कर सकती है। जिन लोगों को पहले से हाई BP है, उन्हें दवाओं में बदलाव या उन्हें बंद करने का फैसला खुद नहीं करना चाहिए।
अगर घर पर बार-बार 145/70 या इससे ज्यादा की रीडिंग आ रही है तो रीडिंग का रिकॉर्ड लेकर डॉक्टर से चर्चा करना बेहतर रहेगा।














