दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ व्यायाम करना ही काफी नहीं है, बल्कि रोजाना के खानपान का भी ध्यान रखना जरूरी है। हमारी थाली में शामिल कुछ खाद्य पदार्थ हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। मछली भी इन्हीं में से एक है। खासतौर पर वसायुक्त मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कम करने और हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली को बनाए रखने में भूमिका निभाता है। सैल्मन, मैकरेल यानी बांगड़ा और सार्डिन ऐसी मछलियां हैं, जिन्हें ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत माना जाता है। इन्हें संतुलित खानपान का हिस्सा बनाने से दिल की सेहत को फायदा मिल सकता है। हालांकि, मछली खाने का मतलब यह नहीं है कि हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसका लाभ तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है, जब खानपान और जीवनशैली के दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाए।
1. सैल्मन मछली दिल के लिए क्यों है फायदेमंद?
सैल्मन को ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियों में गिना जाता है। इसमें मौजूद ईपीए (EPA) और डीएचए (DHA) शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। ये फैटी एसिड खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, शरीर में सूजन को नियंत्रित करने और रक्तचाप पर सकारात्मक असर डालने में भी इनकी भूमिका हो सकती है। अगर आप दिल की सेहत का ध्यान रखते हुए अपनी डाइट में मछली शामिल करना चाहते हैं, तो सैल्मन एक अच्छा विकल्प हो सकती है। इसे नियमित और संतुलित मात्रा में खाने से हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।
2. बांगड़ा यानी मैकरेल भी है अच्छा विकल्प
बांगड़ा, जिसे मैकरेल (Mackerel) भी कहा जाता है, वसायुक्त मछलियों में शामिल है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो दिल और रक्त वाहिकाओं की सेहत बनाए रखने में मददगार हो सकता है। इसके सेवन से शरीर को प्रोटीन भी मिलता है। हालांकि, मैकरेल की अलग-अलग प्रजातियों में पारे (Mercury) की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए मछली खरीदते समय उसकी किस्म पर ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अधिक पारे वाली मछलियों से बचने और सुरक्षित विकल्प चुनने की सलाह दी जाती है।
3. सार्डिन मछली भी रखें डाइट में
सार्डिन छोटी आकार की वसायुक्त मछली है और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसमें प्रोटीन और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व भी होते हैं। इसे खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में यह हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। सार्डिन को पकाने का तरीका भी मायने रखता है। इसे डीप फ्राई करने के बजाय ग्रिल करना, भाप में पकाना या कम तेल में तैयार करना बेहतर विकल्प है। इस तरह भोजन में अतिरिक्त तेल और कैलोरी की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
हफ्ते में कितनी बार खानी चाहिए मछली?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के मुताबिक, दिल की सेहत को ध्यान में रखते हुए सप्ताह में कम से कम दो बार मछली खाना अच्छा माना जाता है। खासतौर पर ओमेगा-3 से भरपूर वसायुक्त मछलियों को प्राथमिकता दी जा सकती है। एक बार में करीब 3 औंस यानी 85 ग्राम पकी हुई मछली खाना एक सामान्य सर्विंग के बराबर है। मछली चुनते समय उसमें पारे की मात्रा पर भी ध्यान दें। कम पारे वाली मछलियों को प्राथमिकता देना बेहतर रहता है। गर्भवती महिलाओं, गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए मछली के चुनाव और मात्रा से जुड़ी सलाह अलग हो सकती है। ऐसे में सुरक्षित किस्मों का चुनाव करना जरूरी है।मछली को अपनी डाइट में शामिल करने के साथ हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी खाएं। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखना भी दिल की सेहत के लिए जरूरी है। मछली खाने से हृदय स्वास्थ्य को फायदा मिल सकता है, लेकिन यह हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी नहीं है।













