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आयुर्वेदिक और अंग्रेजी दवा एक साथ ले रहे हैं? सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर

आयुर्वेदिक, हर्बल और एलोपैथिक दवाएं साथ लेने से दवा का असर बदल सकता है। जानें दवाओं के इंटरैक्शन का खतरा, लिवर पर असर और किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 10 Aug 2026 9:02:27

आयुर्वेदिक और अंग्रेजी दवा एक साथ ले रहे हैं? सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर

आज के समय में कई लोग अपनी बीमारी को कंट्रोल करने के लिए एक साथ अलग-अलग तरह के इलाज का सहारा लेते हैं। मसलन, कोई व्यक्ति ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर की एलोपैथिक दवा ले रहा होता है और इसके साथ आयुर्वेदिक चूर्ण, हर्बल सप्लीमेंट या कोई घरेलू नुस्खा भी आजमा रहा होता है। बहुत से लोगों को लगता है कि आयुर्वेदिक और हर्बल चीजें प्राकृतिक होती हैं, इसलिए उनसे किसी तरह का नुकसान नहीं हो सकता। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा मानना हमेशा सही नहीं है।

दरअसल, प्राकृतिक या हर्बल होने का मतलब यह नहीं है कि कोई चीज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित ही होगी। कुछ आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पाद शरीर में उसी तरह सक्रिय प्रभाव डाल सकते हैं, जैसे दूसरी दवाएं करती हैं। अगर इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना किसी चल रही दवा के साथ लिया जाए तो दोनों के बीच इंटरैक्शन हो सकता है। इससे दवा का असर कम या ज्यादा हो सकता है और कुछ मामलों में मरीज की सेहत पर गंभीर प्रभाव भी पड़ सकता है।

आखिर एक साथ अलग-अलग दवाएं लेने में समस्या क्या है?

जब कोई व्यक्ति डॉक्टर की लिखी हुई दवा के साथ आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक या किसी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करता है और इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को नहीं देता, तो इलाज के दौरान परेशानी पैदा हो सकती है। कई बार मरीज एक बीमारी के लिए किसी डॉक्टर से दवा लेता है, जबकि दूसरी समस्या के लिए किसी वैद्य या होम्योपैथ से उपचार शुरू कर देता है। लेकिन दोनों तरफ चल रहे इलाज के बारे में किसी को पूरी जानकारी नहीं होती।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि मरीज की हालत में आया बदलाव आखिर किस वजह से है। मसलन, बीमारी के बढ़ने के कारण समस्या हो रही है, किसी दवा का साइड इफेक्ट है या फिर दो अलग-अलग चीजों को साथ लेने की वजह से शरीर में प्रतिक्रिया हो रही है। यही वजह है कि मरीज द्वारा ली जा रही हर दवा, हर्बल उत्पाद और सप्लीमेंट की जानकारी डॉक्टर को देना जरूरी माना जाता है।

‘नेचुरल’ चीजें भी शरीर पर डाल सकती हैं असर

आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों को लेकर सबसे आम धारणा यही है कि प्राकृतिक होने के कारण इनसे नुकसान नहीं होता। लेकिन कई पौधों और जड़ी-बूटियों में ऐसे सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर के अलग-अलग अंगों और दवाओं के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं।

कुछ हर्बल उत्पाद खून पतला करने वाली दवाओं के साथ लेने पर ब्लीडिंग यानी अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकते हैं। वहीं कुछ चीजें ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को लग सकता है कि वह नियमित रूप से दवा ले रहा है, लेकिन बीमारी अपेक्षित तरीके से नियंत्रित नहीं हो रही।

कुछ मामलों में इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है। यानी किसी हर्बल उत्पाद की वजह से डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का प्रभाव जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए। इससे ब्लड शुगर बहुत नीचे जाने, ब्लड प्रेशर में अत्यधिक गिरावट या अन्य दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी हर्बल या आयुर्वेदिक उत्पाद को पूरी तरह जोखिम-मुक्त मानना सही नहीं है।

यह भी पढ़ेंः सावन में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया सेहतमंद रहने का सही तरीका

दवाओं के साथ लिवर पर भी बढ़ सकता है दबाव

शरीर में दवाओं को प्रोसेस करने और उन्हें बाहर निकालने में लिवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कई दवाएं लिवर में जाकर टूटती हैं और इसके बाद शरीर से बाहर निकलती हैं। कुछ हर्बल या आयुर्वेदिक पदार्थ इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

अगर किसी पदार्थ की वजह से दवा शरीर में सामान्य से ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो उसका प्रभाव जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है और साइड इफेक्ट का खतरा पैदा हो सकता है। वहीं अगर कोई चीज दवा के शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया को तेज कर दे, तो दवा का असर कम हो सकता है और मरीज को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।

इसी वजह से कई बार मरीज अपनी नियमित दवा सही समय पर लेने के बावजूद बीमारी को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसे मामलों में केवल दवा की मात्रा बढ़ाना समाधान नहीं होता। डॉक्टर को यह भी पता होना जरूरी है कि मरीज इसके अलावा कौन-कौन से हर्बल उत्पाद, सप्लीमेंट या घरेलू नुस्खे इस्तेमाल कर रहा है।

लोग डॉक्टर को हर्बल या घरेलू चीजों के बारे में क्यों नहीं बताते?

इस समस्या की एक बड़ी वजह यह है कि बहुत से लोग हर्बल उत्पाद या घरेलू नुस्खों को दवा की श्रेणी में ही नहीं रखते। उन्हें लगता है कि कोई चूर्ण, काढ़ा, जड़ी-बूटी या हर्बल कैप्सूल दवा नहीं है, इसलिए डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं है। यही छोटी सी जानकारी बाद में इलाज को जटिल बना सकती है।

इसके अलावा बाजार में उपलब्ध हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और उनमें मौजूद सक्रिय तत्वों की मात्रा हमेशा एक जैसी नहीं होती। एक ही नाम वाला उत्पाद अलग-अलग कंपनियों द्वारा अलग फॉर्मूलेशन या अलग मात्रा में तैयार किया जा सकता है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है कि वह उत्पाद मरीज की चल रही दवाओं के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करेगा।

इसलिए डॉक्टर को केवल प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। मरीज को विटामिन, सप्लीमेंट, हर्बल प्रोडक्ट, आयुर्वेदिक दवा और नियमित रूप से लिए जाने वाले घरेलू उपचार के बारे में भी अपने डॉक्टर को बताना चाहिए।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

कुछ लोगों के लिए दवाओं के बीच इंटरैक्शन का जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई नया हर्बल या आयुर्वेदिक उत्पाद शुरू करने से बचना चाहिए। इनके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या मिर्गी जैसी गंभीर या लंबे समय से चली आ रही बीमारी वाले मरीजों को भी विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

कई लोग किसी छोटी समस्या के लिए हर्बल उत्पाद लेना शुरू करते हैं और बाद में उसे कई महीनों तक जारी रखते हैं। इस दौरान वे यह जांच नहीं करते कि इसका उनकी नियमित दवाओं पर कोई असर पड़ रहा है या नहीं। लंबे समय तक ऐसा करने से दवा की प्रभावशीलता या शरीर पर उसके असर में बदलाव आ सकता है।

इसलिए अगर आप पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं और उसके साथ आयुर्वेदिक, हर्बल या कोई अन्य उपचार शुरू करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर को इसकी पूरी जानकारी दें। किसी भी दवा को खुद से बंद करना, उसकी मात्रा बदलना या दूसरी दवा के साथ जोड़ना सही कदम नहीं है। सुरक्षित इलाज के लिए डॉक्टर को आपके द्वारा इस्तेमाल की जा रही सभी दवाओं और उत्पादों की पूरी जानकारी होना जरूरी है।

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