वैलेंटाइन वीक के पांचवे दिन यानी 13 फरवरी को किस डे सेलिब्रेट किया जाता है, जो प्यार, अपनापन और सम्मान का प्रतीक है। किस करना न केवल रोमांस की अभिव्यक्ति है, बल्कि यह रिश्ते में गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। बॉलीवुड भी कई सालों से प्यार और रोमांस की इस अनोखी अभिव्यक्ति का जश्न मना रहा है, और यह मॉर्डन रोमांस को स्क्रीन पर खूबसूरती से दिखाने का एक आदर्श तरीका बन चुका है।
आज हम आपको किस डे के मौके पर यह बताने जा रहे हैं कि बॉलीवुड में किसिंग सीन की शुरुआत किस फिल्म से हुई थी और किसने इसे स्क्रीन पर पहले बार दिखाया था।
फिल्म 'कर्मा' से शुरू हुआ था किसिंग सीन का सिलसिला
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारतीय सिनेमा में पहला किसिंग सीन 1933 में आई फिल्म ‘कर्मा’ में था, जो करीब चार मिनट लंबा था। यह सीन तब के प्रमुख फिल्म स्टार्स देविका रानी और हिमांशु राय द्वारा किया गया था, जो असल जिंदगी में पति-पत्नी थे। उस वक्त देविका रानी को फिल्म इंडस्ट्री की सबसे ग्लैमरस और खूबसूरत अदाकारा माना जाता था।
देविका रानी और हिमांशु राय का चार मिनट लंबा किस सीन: बॉलीवुड की पहली बड़ी कंट्रोवर्सी
देविका रानी और हिमांशु राय भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कपल माने जाते हैं। दोनों बॉम्बे टॉकिज के संस्थापक थे और उनकी मुलाकात लंदन में हुई थी। इनकी शादी 1929 में हुई थी, और इसके चार साल बाद 1933 में उनकी फिल्म ‘कर्मा’ रिलीज़ हुई। इस फिल्म में एक ऐतिहासिक किसिंग सीन था, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हुआ।
कर्मा के 4 मिनट लंबे किस सीन की कहानी
फिल्म के इस किसिंग सीन में देविका रानी और हिमांशु राय के बीच एक बेहोशी की हालत का दृश्य था, जिसमें देविका को हिमांशु को किस करके जगाना था। यह सीन फिल्माया गया था, जिसमें देविका ने हिमांशु को चार मिनट तक किस किया। उस दौर में यह एक बड़ा कदम था, क्योंकि भारतीय सिनेमा में इससे पहले कभी भी इतना लंबा किस सीन नहीं दिखाया गया था। इस सीन ने कर्मा को सबसे लंबा किस सीन देने का रिकॉर्ड भी दिलवाया था।
किस सीन पर मचा था हंगामा
हालांकि, यह सीन एक कंट्रोवर्सी का कारण भी बना था। जब फिल्म ‘कर्मा’ रिलीज़ हुई, तो इस किसिंग सीन पर बहुत आलोचना की गई थी। खासतौर से, यह सीन इस कारण विवादों में आया था क्योंकि हिमांशु राय और देविका रानी की उम्र में 16 साल का अंतर था। इसके बावजूद, दोनों पहले से ही शादीशुदा थे, और इस सीन को करना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं था।
कर्मा फिल्म भारत में फ्लॉप हो गई थी, लेकिन विदेशों में इसे हिट माना गया था। खास बात यह थी कि फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग विंडसर में शाही परिवार के लिए आयोजित की गई थी। इस फिल्म की सफलता के बाद, देविका और हिमांशु को स्टार मटेरियल माना गया था, लेकिन फिल्म के बाद उनका रिश्ता धीरे-धीरे फीका पड़ने लगा था। 1935 में देविका रानी ने नजम उल हसन के साथ भाग जाने का फैसला किया।
इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में किसिंग सीन को एक नए तरीके से पेश किया और प्यार की अभिव्यक्ति का एक नया तरीका स्थापित किया। फिल्म की शूटिंग के दौरान यह सीन भारतीय सिनेमा की पहली बार किसिंग सीन के रूप में फिल्माया गया, जो उस दौर के दर्शकों के लिए एक बड़ा आश्चर्य था।