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शिवलिंग पर बेलपत्र का कौन सा हिस्सा चढ़ाना उचित है? महाशिवरात्रि पर जानें बिल्वपत्र अर्पण की संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका जानें। कौन सा बेलपत्र अर्पित करें, किस दिशा में रखें, कितनी संख्या में चढ़ाएं और किन नियमों का पालन जरूरी है—पढ़ें संपूर्ण विधि और धार्मिक महत्व।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 15 Feb 2026 09:32:10

शिवलिंग पर बेलपत्र का कौन सा हिस्सा चढ़ाना उचित है? महाशिवरात्रि पर जानें बिल्वपत्र अर्पण की संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां

भगवान शिव की उपासना अत्यंत सरल और सहज मानी गई है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भव्य सामग्री की नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा की आवश्यकता होती है। जल और बेलपत्र अर्पित कर भी भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह सर्वविदित है कि महादेव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है, लेकिन बहुत से श्रद्धालु यह नहीं जानते कि कौन सा बेलपत्र चुनना चाहिए, किस प्रकार अर्पित करना चाहिए और किन नियमों का पालन जरूरी है। कई बार लोग बिना विधि जाने बेलपत्र चढ़ा देते हैं, जबकि शास्त्रों में इसके स्पष्ट निर्देश बताए गए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने की सही प्रक्रिया क्या है और किन पत्तों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

शिवलिंग पर किस प्रकार का बेलपत्र चढ़ाना चाहिए?

बेलपत्र एक, तीन या पांच पत्तियों वाले रूप में मिलता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जितने अधिक पत्र जुड़े होते हैं, उसे उतना ही शुभ माना जाता है। फिर भी शिव पूजा में विशेष रूप से तीन पत्तियों वाला बेलपत्र श्रेष्ठ बताया गया है। त्रिदलीय बेलपत्र को विषम संख्या में चढ़ाने की परंपरा है, जैसे 3, 7, 11, 21, 51 या 101। विषम संख्या को शुभ और मंगलकारी माना गया है।

ध्यान रखें कि पूजा में सदैव स्वच्छ और अखंड बेलपत्र का ही उपयोग करें। कटे-फटे, दागदार या टूटे हुए पत्ते अर्पित करना अशुभ माना गया है। कीड़ों से खाया हुआ, पीला पड़ा या क्षतिग्रस्त बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसी सामग्री से पूजा अधूरी मानी जाती है।

जहां तक संभव हो, ताजे तोड़े हुए बेलपत्र ही अर्पित करें। यदि किसी कारणवश एक-दो दिन पहले के पत्तों का उपयोग करना पड़े, तो उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखें। शास्त्रों में उल्लेख है कि बेलपत्र छह महीने तक बासी नहीं माना जाता, बशर्ते वह सूखा या मुरझाया न हो।

यदि पूजा के समय बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो पहले अर्पित किया गया साफ और अखंड बेलपत्र पुनः चढ़ाया जा सकता है। मान्यता है कि बिल्वपत्र कभी अपवित्र नहीं होता, इसलिए श्रद्धा भाव से पुनः अर्पण किया जा सकता है।

बेलपत्र अर्पित करने की सही विधि

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है—

यदि बेलपत्र में तीन से अधिक पत्तियां हों, तो वे एक ही डंडी से जुड़ी होनी चाहिए।

अर्पण से पहले बेलपत्र को स्वच्छ जल से धो लें।

चाहें तो चंदन से उस पर ‘ॐ’ या ‘श्रीराम’ लिख सकते हैं।

बेलपत्र को अनामिका, अंगूठा और मध्यमा उंगली से पकड़कर चढ़ाना शुभ माना जाता है।

बीच की पत्ती को थामकर ही शिवलिंग पर अर्पित करें।

बेलपत्र को उल्टा रखें, ताकि उसका चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे।

अर्पण करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप अवश्य करें।

पूजा क्रम का ध्यान रखें—पहले जल से अभिषेक करें, उसके बाद बेलपत्र चढ़ाएं। जलाभिषेक से पहले बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।

इन नियमों का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही क्यों है विशेष?

त्रिदलीय बेलपत्र का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इसके तीन पत्ते ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माने जाते हैं। एक ही डंडी में जुड़े तीन पत्र त्रिपुंड (माथे पर लगाई जाने वाली तीन रेखाएं) तथा तीन गुण—सत्व, रज और तम—का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे भगवान शिव के त्रिशूल का प्रतीक भी माना जाता है।

बिल्वपत्र की प्रकृति शीतल होती है। मान्यता है कि यह शिव की उग्र ऊर्जा को शांत और संतुलित रखता है। साथ ही, यह शरीर के तीन दोष—वात, पित्त और कफ—का भी संकेत देता है। इस प्रकार बेलपत्र केवल पूजा सामग्री ही नहीं, बल्कि गहन दार्शनिक अर्थों से जुड़ा हुआ प्रतीक है।

शिव को बिल्वपत्र क्यों है अत्यंत प्रिय?

पुराणों में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। अपनी साधना के दौरान वे प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करती थीं। कहा जाता है कि माता गौरी ने ही सबसे पहले शिव को बिल्वपत्र अर्पित किया था। उनकी अटूट भक्ति और तप से प्रसन्न होकर महादेव ने उनकी मनोकामना पूर्ण की।

तभी से यह परंपरा प्रचलित हुई कि शिव केवल जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। जो भक्त सच्चे मन से बिल्वपत्र अर्पित करता है, उसकी प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस प्रकार, महाशिवरात्रि या किसी भी शिव पूजा में बेलपत्र अर्पित करते समय विधि, पवित्रता और श्रद्धा—इन तीनों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यही सच्ची शिव आराधना का मूल है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

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