न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

संतान की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए खास है गोवत्स द्वादशी, इस विधि से करें गौ माता की पूजा

गोवत्स द्वादशी 2026 कब है? जानें गाय-बछड़े की पूजा विधि, अर्घ्य मंत्र, धार्मिक महत्व, संतान सुख की मान्यता और व्रत के जरूरी नियम।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 05 Nov 2026 8:32:01

संतान की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए खास है गोवत्स द्वादशी, इस विधि से करें गौ माता की पूजा

गोवत्स द्वादशी हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है। इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवत्स द्वादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से गाय-बछड़े का पूजन करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर संतान सुख की कामना रखने वाले लोगों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साल 2026 में गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर, गुरुवार को मनाई जा रही है। इस पर्व को बच्छ दुआ, बछ बारस और वसु बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु गौ माता को तिलक लगाकर फूल-माला पहनाते हैं और उनकी आरती करते हैं। आइए जानते हैं गोवत्स द्वादशी का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, अर्घ्य मंत्र और व्रत के जरूरी नियम।

कब है गोवत्स द्वादशी 2026? जानें तिथि और पूजा मुहूर्त

गोवत्स द्वादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 5 नवंबर, गुरुवार को पड़ रहा है। जयपुर के पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।

इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में गाय और बछड़े की पूजा करना शुभ माना जाता है।

- गोवत्स द्वादशी: 5 नवंबर 2026, गुरुवार
- द्वादशी तिथि प्रारंभ: 5 नवंबर, सुबह 10:36 बजे
- द्वादशी तिथि समाप्त: 6 नवंबर, सुबह 10:31 बजे
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक।

ध्यान रखें कि पूजा का मुहूर्त शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

क्यों मनाई जाती है गोवत्स द्वादशी? जानें धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में गाय को पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि गोवत्स द्वादशी पर गाय के साथ उसके बछड़े की पूजा करने का विशेष विधान है। इस पर्व को संतान सुख की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और गौ माता तथा बछड़े का पूजन करने से संतान की खुशहाली और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने पहली बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गौ माता के दर्शन किए थे और उनकी विधि-विधान से पूजा की थी। इसी परंपरा के कारण इस दिन गौ पूजन का विशेष महत्व बताया जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना भी की जाती है। भक्त परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

बच्छ दुआ और वसु बारस के नाम से भी है प्रसिद्ध

गोवत्स द्वादशी को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में इसे बछ बारस या बच्छ दुआ कहा जाता है, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में वसु बारस के नाम से इसकी विशेष मान्यता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को भी गोवत्स द्वादशी या बछ बारस के रूप में मनाया जाता है। वहीं कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी पर मनाए जाने वाले वसु बारस का भी विशेष महत्व है। इस तरह पर्व की तिथि और परंपराओं में क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलता है।

गोवत्स द्वादशी पर कैसे करें गाय और बछड़े की पूजा?

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर गौ माता और उनके बछड़े की पूजा की तैयारी करें।

पूजा की विधि इस प्रकार है:

1. सबसे पहले गाय और बछड़े को साफ पानी से स्नान कराएं। यदि संभव न हो तो उन्हें साफ कपड़े से धीरे-धीरे पोंछकर स्वच्छ करें।
2. इसके बाद दोनों को नए वस्त्र या सजावटी कपड़े अर्पित करें। उनके गले में फूलों की माला पहनाएं।
3. गौ माता और बछड़े के माथे पर सिंदूर, चंदन या रोली का तिलक लगाएं।
4. गाय के सींगों पर गेरू लगाकर पारंपरिक तरीके से उनका श्रृंगार करें।
5. पूजा के लिए एक पात्र में जल, अक्षत, फूल, तिल और थोड़ी गंध मिलाकर अर्घ्य तैयार करें।
6. मंत्र का उच्चारण करते हुए गाय और बछड़े के सामने अर्घ्य अर्पित करें।
7. इसके बाद दोनों को भोग लगाएं और घी के दीपक से आरती करें।

पूजा के दौरान गाय और बछड़े को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।

गोवत्स द्वादशी का अर्घ्य मंत्र और उसका अर्थ

गौ माता की पूजा के दौरान अर्घ्य अर्पित करते समय विशेष मंत्र का उच्चारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के साथ पूजा करने से गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अर्घ्य मंत्र:

क्षीरोदार्णव सम्भूते सुरासुर नमस्कृते।

सर्वदेवमये मातर् गृहाणार्घ्य नमो नमः॥

मंत्र का अर्थ:

हे देव स्वरूपिणी माता! आप क्षीर सागर से उत्पन्न हुई हैं और देवताओं तथा असुरों द्वारा भी आपकी वंदना की जाती है। आप सभी देवी-देवताओं का स्वरूप हैं। मेरे द्वारा अर्पित इस अर्घ्य को स्वीकार करें। आपको बार-बार प्रणाम है।

भोग लगाकर करें गौ माता की आरती

अर्घ्य अर्पित करने के बाद गाय और बछड़े को भोग लगाया जाता है। इसके बाद घी का दीपक जलाकर दोनों की आरती करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति, संतान की खुशहाली और घर में समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद व्रत का पालन करें। शाम के समय फलाहार करके व्रत खोलने की परंपरा भी है। कुछ परिवारों में यह व्रत तीन दिनों तक फलाहार के साथ रखने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, व्रत की अवधि और पारण की विधि अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।

गोवत्स द्वादशी पर किन बातों का रखें ध्यान?

गोवत्स द्वादशी के दिन पूजा और व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोग दूध, दही, घी और दूध से बनी मिठाइयों से परहेज करते हैं। हालांकि, खानपान से जुड़े नियम क्षेत्र और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। इस दिन गौ माता और बछड़े की सेवा करना, उन्हें उचित चारा खिलाना और उनकी देखभाल करना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

FAQ

Q1. गोवत्स द्वादशी 2026 में कब मनाई जा रही है?

गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर 2026, गुरुवार को मनाई जा रही है। जयपुर में द्वादशी तिथि सुबह 10:36 बजे शुरू होकर 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे समाप्त होगी।

Q2. गोवत्स द्वादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत संतान सुख, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है।

Q3. गोवत्स द्वादशी पर किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भी आराधना की जाती है।

Q4. गोवत्स द्वादशी पर कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?

पूजा के दौरान इस अर्घ्य मंत्र का जाप किया जाता है- क्षीरोदार्णव सम्भूते सुरासुर नमस्कृते। सर्वदेवमये मातर् गृहाणार्घ्य नमो नमः॥

Q5. गोवत्स द्वादशी पर क्या खाना वर्जित है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गाय के दूध से बनी चीजों जैसे दूध, दही और दूध से बनी मिठाइयों का सेवन नहीं किया जाता। इस नियम का पालन क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है।

नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

राज्य
View More

Shorts see more

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

  • UPI से पैसे भेजना आसान है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए PIN का ध्यान रखना जरूरी है।
  • समय-समय पर UPI PIN बदलने से ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा कम होता है।
  • PIN भूलने पर डेबिट कार्ड और OTP से आसानी से रीसेट किया जा सकता है।
read more

ताजा खबरें
View More

ईरान से जंग पड़ी ट्रंप की पार्टी पर भारी! चुनावी हार के बाद भी हमले के फैसले पर अड़े राष्ट्रपति
ईरान से जंग पड़ी ट्रंप की पार्टी पर भारी! चुनावी हार के बाद भी हमले के फैसले पर अड़े राष्ट्रपति
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद चुनाव आयोग का यू-टर्न, Form 6 से अलग हुआ SIR का कॉलम
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद चुनाव आयोग का यू-टर्न, Form 6 से अलग हुआ SIR का कॉलम
‘आइए हो जाए दो-दो हाथ’, अखिलेश यादव को राजभर की खुली चुनौती, बोले- नेता क्या जो चुनाव से भागे?
‘आइए हो जाए दो-दो हाथ’, अखिलेश यादव को राजभर की खुली चुनौती, बोले- नेता क्या जो चुनाव से भागे?
किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी; योगी सरकार की नई घोषणाएं
किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी; योगी सरकार की नई घोषणाएं
अमेरिका में भारतीय मूल के नेताओं का जलवा, तीनों डेमोक्रेटिक चेहरों ने दर्ज की जीत
अमेरिका में भारतीय मूल के नेताओं का जलवा, तीनों डेमोक्रेटिक चेहरों ने दर्ज की जीत
भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल का अमेरिका में जलवा, 88% वोटों के साथ छठी बार बनीं सांसद
भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल का अमेरिका में जलवा, 88% वोटों के साथ छठी बार बनीं सांसद
रणबीर कपूर की 'रामायण' ने रिलीज से पहले ही रचा इतिहास, एडवांस बुकिंग से कमाए 130 करोड़ रुपये
रणबीर कपूर की 'रामायण' ने रिलीज से पहले ही रचा इतिहास, एडवांस बुकिंग से कमाए 130 करोड़ रुपये
2027 में शनि बदलेंगे चाल, इन 5 राशियों की जिंदगी में आने वाला है बड़ा बदलाव!
2027 में शनि बदलेंगे चाल, इन 5 राशियों की जिंदगी में आने वाला है बड़ा बदलाव!
गोरखपुर में अवैध खून तस्करी का खुलासा, 100 यूनिट PRBC के साथ मुरादाबाद के दो आरोपी गिरफ्तार
गोरखपुर में अवैध खून तस्करी का खुलासा, 100 यूनिट PRBC के साथ मुरादाबाद के दो आरोपी गिरफ्तार
Oppo Find X10 Ultra में मिल सकती है 8000mAh बैटरी और 10x ऑप्टिकल जूम, 200MP कैमरे के साथ आएगा प्रीमियम फोन
Oppo Find X10 Ultra में मिल सकती है 8000mAh बैटरी और 10x ऑप्टिकल जूम, 200MP कैमरे के साथ आएगा प्रीमियम फोन
'रामायण' को लेकर आशीष चंचलानी की बड़ी भविष्यवाणी, बोले- भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर होगी फिल्म
'रामायण' को लेकर आशीष चंचलानी की बड़ी भविष्यवाणी, बोले- भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर होगी फिल्म
Honor का नया धमाका! 15,000mAh बैटरी वाले फोन की टेस्टिंग शुरू, एक चार्ज में चलेगा 7 दिन
Honor का नया धमाका! 15,000mAh बैटरी वाले फोन की टेस्टिंग शुरू, एक चार्ज में चलेगा 7 दिन
दिवाली पर मां लक्ष्मी को कमल चढ़ाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें पूजा के जरूरी नियम
दिवाली पर मां लक्ष्मी को कमल चढ़ाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें पूजा के जरूरी नियम
दूल्हे का दोस्त है या दुश्मन? दुल्हन के सिर पर चला दी स्पार्कल गन, आग लगने का वीडियो वायरल
दूल्हे का दोस्त है या दुश्मन? दुल्हन के सिर पर चला दी स्पार्कल गन, आग लगने का वीडियो वायरल