धनतेरस का पर्व इस साल 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार का दीपावली से पहले विशेष महत्व होता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि कुबेर देव की आराधना करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही वजह है कि इस दिन लोग अपने पूजा स्थल के साथ-साथ तिजोरी और धन रखने के स्थान पर भी विशेष पूजा करते हैं। धनतेरस पर कुबेर पूजा के लिए प्रदोष काल को शुभ माना जाता है। जयपुर में 6 नवंबर को पूजा का मुहूर्त शाम 6:11 बजे से रात 8:07 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और पंचांग की गणना के कारण मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
धनतेरस पर किस दिशा में करें कुबेर देव की पूजा?
भगवान कुबेर को उत्तर दिशा का अधिपति और देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा के लिए घर की उत्तर दिशा में साफ-सुथरा स्थान तैयार करने की परंपरा है। पूजा शुरू करने से पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान कुबेर की प्रतिमा, तस्वीर या कुबेर यंत्र स्थापित करें। यदि घर में कुबेर देव की प्रतिमा, तस्वीर या यंत्र उपलब्ध नहीं है, तो तिजोरी अथवा गहनों के बक्से को प्रतीक मानकर भी पूजा की जा सकती है। इसके लिए तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें। पूजा की सभी सामग्री पहले से एकत्र कर लें, ताकि विधि के दौरान किसी चीज की कमी न रहे।
सबसे पहले करें भगवान गणेश का पूजन
हिंदू धार्मिक परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। इसलिए कुबेर देव की आराधना से पहले गणेश जी का ध्यान और पूजन करें। इसके बाद हाथ में पुष्प लेकर भगवान कुबेर का ध्यान करें और उनका आवाहन करें।
कुबेर देव के ध्यान के लिए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है—
कुबेर ध्यान मंत्र:
मनुज-बाह्य-विमान-स्थितम्,
गरुड-रत्न-निभं निधि-नायकम्।
शिव-सखं मुकुटादि-विभूषितम्,
वर-गदे दधतं भजे तुन्दिलम्॥
यह मंत्र भगवान कुबेर के स्वरूप का ध्यान करने के लिए बताया गया है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
कुबेर देव को अर्पित करें जल, चंदन और पुष्प
भगवान कुबेर की प्रतिमा, तस्वीर, कुबेर यंत्र या तिजोरी पर जल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद भगवान कुबेर के मंत्र 'ॐ श्रीं कुबेराय नमः' का 11 या 108 बार जाप करें। अपनी श्रद्धा और पूजा की पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र जाप की संख्या रख सकते हैं। पूजा के दौरान भगवान कुबेर को मिठाई, फल और पंचामृत का भोग लगाएं। धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का पूजन भी करें। इसके बाद आरती करके प्रसाद वितरित करें। मान्यता के अनुसार पूजा पूरी होने पर तिजोरी में एक सिक्का या कुबेर यंत्र स्थापित किया जाता है। इससे धन की रक्षा और घर में समृद्धि बने रहने की कामना की जाती है।
प्रदोष काल में धन रखने के स्थान पर जलाएं 13 दीपक
धनतेरस पर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान घर के उस स्थान पर 13 दीपक जलाने की परंपरा है, जहां धन और कीमती सामान रखा जाता है। दीपक जलाते समय भगवान कुबेर का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। ध्यान रखें कि दीपदान की संख्या और स्थान से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए अपने घर की प्रचलित धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।
पूजा में अर्पित करें सात प्रकार के अनाज
भगवान कुबेर की पूजा में सप्त धान्य यानी सात तरह के अनाज अर्पित करने की भी परंपरा बताई गई है। इसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल हैं। इन अनाजों को पूजा स्थल पर रखकर पुष्प, अक्षत और धूप से भगवान कुबेर का पूजन करें। भोग के लिए सफेद रंग की मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ फल और अन्य प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखें।
कौन हैं भगवान कुबेर और क्यों की जाती है उनकी पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें धन, वैभव, रत्न और संपत्ति का अधिपति माना जाता है। भगवान शिव के मित्र के रूप में भी उनका उल्लेख मिलता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ कुबेर देव की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि लक्ष्मी को धन और ऐश्वर्य की देवी तथा कुबेर को धन का संरक्षक माना जाता है। इसी मान्यता के चलते धनतेरस पर लोग अपने घर के पूजा स्थल, तिजोरी और धन रखने के स्थान की सफाई करके विधि-विधान से पूजा करते हैं। श्रद्धालु इस दिन भगवान कुबेर से परिवार की आर्थिक खुशहाली, धन की रक्षा और जीवन में सुख-संपन्नता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
FAQ
Q1. धनतेरस 2026 कब मनाई जाएगी?
धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है।
Q2. धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
भगवान कुबेर की पूजा के लिए घर की उत्तर दिशा में पूजा स्थल तैयार करने की परंपरा है। यहां चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उनकी प्रतिमा, तस्वीर या कुबेर यंत्र स्थापित कर सकते हैं।
Q3. भगवान कुबेर की पूजा का मंत्र क्या है?
भगवान कुबेर की पूजा में 'ॐ श्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसे 11 या 108 बार दोहराने की परंपरा है।
Q4. धनतेरस पर कुबेर पूजा के लिए कौन-सी सामग्री अर्पित की जाती है?
पूजा में जल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाया जाता है।
Q5. धनतेरस पर भगवान कुबेर को सात प्रकार के कौन-से अनाज चढ़ाए जाते हैं?
सप्त धान्य के रूप में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद पुष्प, अक्षत और धूप से पूजा की जाती है।
नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।














