क्या पाकिस्तान के रास्ते भारत के खिलाफ रची जा रही है नई आतंकी साजिश? हमास और लश्कर कमांडरों की गुप्त मुलाकात से बढ़ी चिंता

पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता नजर आ रहा है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें हमास के वरिष्ठ कमांडर नजी जहीर और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कुख्यात कमांडर राशिद अली संधू को एक साथ देखा गया है। यह मुलाकात पाकिस्तान के गुजरांवाला शहर में हुई, जिसे सुरक्षा एजेंसियां बेहद अहम मान रही हैं।

बताया जा रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई। गौरतलब है कि पीएमएमएल को लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक चेहरा माना जाता है। इस कार्यक्रम में नजी जहीर को मुख्य अतिथि के तौर पर मंच दिया गया, जबकि राशिद अली संधू पीएमएमएल के नेता के रूप में मौजूद था। दोनों की यह नजदीकी भारत विरोधी साजिशों की ओर इशारा कर रही है।

पीओके दौरे से पहले भी सक्रिय रहा है हमास कमांडर

नजी जहीर वही हमास नेता है, जिसने फरवरी 2025 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का दौरा किया था। यह दौरा उस समय हुआ, जब पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिए जाने में कुछ ही हफ्ते बाकी थे। पीओके में रहते हुए जहीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडरों के साथ मंच साझा किया और भारत विरोधी रैली को संबोधित किया था।

उसकी पाकिस्तान से नजदीकियां कोई नई बात नहीं हैं। जनवरी 2024 में नजी जहीर कराची पहुंचा था, जहां उसने कराची प्रेस क्लब में मीडिया से खुलकर बातचीत की। इसके बाद अप्रैल 2024 में वह इस्लामाबाद गया, जहां इस्लामाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने उसे विशेष सम्मान भी दिया। यह घटनाक्रम पाकिस्तान में हमास की खुलेआम मौजूदगी को दर्शाता है।

लगातार पाकिस्तान दौरे और कट्टरपंथी मंचों पर मौजूदगी

7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के ठीक एक सप्ताह बाद, यानी 14 अक्टूबर को नजी जहीर पाकिस्तान पहुंचा। यहां उसकी मुलाकात देश की बड़ी इस्लामिस्ट पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान से हुई। उसी दिन उसने पेशावर में आयोजित मुफ्ती महमूद सम्मेलन को भी संबोधित किया, जिसमें खालिद मशाल वीडियो लिंक के जरिए शामिल हुआ था।

इसके बाद 29 अक्टूबर 2023 को जहीर बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में आयोजित ‘अल-अक्सा स्टॉर्म’ सम्मेलन में नजर आया। नवंबर 2023 में वह कराची में हुए ‘तूफान-ए-अक्सा’ सम्मेलन में भी शामिल हुआ। इन तमाम कार्यक्रमों में उसकी सक्रिय भागीदारी इस बात की ओर इशारा करती है कि हमास के शीर्ष नेता पाकिस्तान में न सिर्फ बेखौफ घूम रहे हैं, बल्कि स्थानीय आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ मजबूत तालमेल भी बना रहे हैं।