मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबर के बाद क्षेत्र में हालात और विस्फोटक हो गए हैं। इसके बाद अमेरिका ने भी सैन्य मोर्चा संभाल लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसे उन्होंने अब तक का सबसे बड़ा और जटिल ऑपरेशन बताया।
तनाव यहीं नहीं थमा। ईरान की ओर से इजरायल को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले की भी खबर सामने आई है। इन घटनाओं के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि ईरान को जल्द ही इसके परिणाम भुगतने होंगे।
न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरा जनाक्रोशईरान पर अमेरिकी हमले के विरोध में अमेरिका के सबसे बड़े शहर New York City में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ईरान के झंडे और युद्ध-विरोधी तख्तियां नजर आईं। भीड़ “नो वॉर” और “फंड पीपल, नॉट वॉर” जैसे नारे लगा रही थी।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि सरकार को सैन्य अभियानों पर अरबों डॉलर खर्च करने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क है कि आम नागरिकों को युद्ध नहीं, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
ईरान का आरोप—अमेरिका ने चुनी हुई जंगईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में एक “चुनावी युद्ध” में कदम रखा है। उनके अनुसार, तथाकथित “ईरानी खतरे” का कोई वास्तविक आधार नहीं था और मौजूदा संघर्ष की जिम्मेदारी उन ताकतों पर है जो क्षेत्र में अस्थिरता चाहती हैं।
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिकी जनता इससे बेहतर नेतृत्व की हकदार है और उन्हें अपने देश की नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
वॉशिंगटन का सख्त रुखदूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, तब तक अमेरिकी प्रशासन पीछे हटने वाला नहीं है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। मध्य पूर्व में जारी इस टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।