तेल संकट के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम, 10 हजार करोड़ के ATF सपोर्ट फंड को मंजूरी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच विमानन ईंधन की कीमतों में तेज उछाल ने एविएशन सेक्टर की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। बुधवार (3 जून) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) सपोर्ट फंड को मंजूरी दी गई। इस फंड के जरिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखने और कंपनियों को वित्तीय दबाव से राहत देने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार ने क्यों लिया यह निर्णय?

इस फंड का मुख्य उद्देश्य एयरलाइंस सेक्टर को लगातार बढ़ती और अस्थिर एटीएफ कीमतों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ता है, जिसे संतुलित करने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।

यह एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट योजना अगले 36 महीनों तक लागू रहेगी। हालांकि इसकी हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और यह योजना तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी अग्रिम सहायता राशि की रिकवरी या समायोजन नहीं हो जाता, जो भी स्थिति पहले बनती है।

सरकारी बयान के अनुसार, यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल कीमतों को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि ईंधन बाजार में स्थिरता बनाए रखना भी है।

एयरलाइंस के लिए विशेष खरीद व्यवस्था

इस योजना के तहत भाग लेने वाली एयरलाइंस कंपनियों को एक तय अवधि के लिए केवल सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से ही एटीएफ खरीदना होगा। यह व्यवस्था अधिकतम तीन वर्षों तक लागू रह सकती है, हालांकि हर साल इसकी समीक्षा की जाएगी।

सरकार के अनुसार, यह कदम एयरलाइंस को ईंधन लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करेगा। इससे कंपनियां अपने परिचालन खर्च और वित्तीय योजनाओं को अधिक स्थिर और प्रभावी ढंग से तैयार कर सकेंगी, जिससे पूरे एविएशन सेक्टर को लाभ मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय संकट से बढ़ी कीमतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एटीएफ की कीमतों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।

मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। केवल दो महीनों के भीतर कीमतों में लगभग ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत पर भारी दबाव पड़ा है और पूरे सेक्टर की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।