दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित ‘फ्लोरिश स्टे’ बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में बुधवार को हुई भीषण आग ने पूरे शहर को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 11 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद आग लगने के पीछे की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई जांच एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर पड़ताल में जुटी हुई हैं। इस हादसे में घायल हुए कुल 35 लोगों में से 19 की हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है, जिनका इलाज दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
इमारत कहां थी और कैसे चल रहा था संचालनजानकारी के अनुसार, यह हादसा दक्षिणी दिल्ली के एक ऐसे इलाके में हुआ, जो ‘Delhi’ के दक्षिण जोन में आता है। जिस इमारत में यह आग लगी, वह ‘लाल डोरा’ श्रेणी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्थित थी। प्रारंभिक रिकॉर्ड बताते हैं कि इस ढांचे का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था, जिसके बाद वर्ष 2012-13 के आसपास इसका पुनर्निर्माण या बड़े स्तर पर नवीनीकरण किया गया था।
यह ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल मुख्य रूप से उन लोगों के लिए बनाया गया था जो पास के अस्पतालों में इलाज या देखभाल के लिए आते थे और अल्पकालिक ठहराव की आवश्यकता रखते थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह इलाका विदेशी नागरिकों और बाहरी मरीजों की आवाजाही वाला क्षेत्र है, ऐसे में घटना के बाद पर्यटकों और निवासियों में चिंता का माहौल बन गया है। इसी वजह से प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय लिया है।
अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन की आशंकानगर निकाय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में अवैध और बिना अनुमति वाली व्यावसायिक इमारतों पर कार्रवाई की तैयारी के तहत अब सीलिंग अभियान शुरू किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई गुरुवार से दक्षिण जोन में लागू की जाएगी।
Municipal Corporation of Delhi के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि बेड एंड ब्रेकफास्ट संचालन की अनुमति केवल सीमित दायरे में दी गई थी, लेकिन जमीनी स्थिति इससे काफी अलग पाई गई। उनके अनुसार, अनुमति सिर्फ छह कमरों तक सीमित थी, जबकि मौके पर लगभग 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। यह भी सामने आया है कि भवन के लिए न तो कोई स्वीकृत नक्शा मौजूद था और न ही विधिवत मंजूर लेआउट।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह इमारत 2012-13 के आसपास पुनर्निर्मित की गई थी और इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि यह मूल रूप से एक रिहायशी क्षेत्र में स्थित संपत्ति है जो व्यावसायिक सड़क से जुड़ी हुई है।
सीलिंग अभियान और आगे की कार्रवाईप्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि इस तरह की अन्य इमारतों की भी पहचान की जा रही है और सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगले 48 घंटों के भीतर उन सभी संपत्तियों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जो बिना अनुमति के व्यावसायिक रूप से संचालित हो रही हैं। जांच टीम यह भी देख रही है कि इस इलाके में कितनी अन्य इमारतें इसी तरह के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।
‘लाल डोरा’ व्यवस्था और नियमों की जटिलताअधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह इमारत ‘लाल डोरा’ क्षेत्र में आती है, जो गांवों के शहरी सीमा विस्तार के दौरान बना एक ऐतिहासिक प्रशासनिक वर्गीकरण है। इस व्यवस्था के तहत कई बार संपत्तियों को भवन निर्माण नियमों और सख्त मंजूरी प्रक्रियाओं से आंशिक छूट मिल जाती है।
ऐतिहासिक रूप से इन क्षेत्रों में लोग बिना विस्तृत स्वीकृत नक्शों के निर्माण कर लेते थे, जिससे कई बार नियामकीय खामियां रह जाती हैं। हालांकि समय के साथ इन इलाकों में भी शहरी नियमों को सख्ती से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।