खरीदना बंद करने से यह युद्ध समाप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक इस संघर्ष का समाधान व्यापारिक फैसलों में नहीं, बल्कि कूटनीति, बातचीत और वार्ता के जरिए निकलेगा।
जयशंकर ने यह बात पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के बाद कही। उन्होंने बताया कि चर्चा के दौरान यूक्रेन में जारी युद्ध समेत कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत ने रूस से तेल खरीदने की वजह बताईविदेश मंत्री ने कहा कि भारत की जिम्मेदारी देश की करीब 1.4 अरब आबादी की जरूरतों को पूरा करना है। मौजूदा परिस्थितियों में तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी देश से तेल, एल्युमिना, उर्वरक, धातु या खनिज खरीदने अथवा न खरीदने से रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत नहीं होगा।
जयशंकर के अनुसार, युद्ध तभी समाप्त हो सकता है जब दोनों पक्ष कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ें। उन्होंने इस समस्या को व्यापार के बजाय एक सैन्य संघर्ष के रूप में देखने की जरूरत बताई और कहा कि इसका समाधान बातचीत में है।
रूस और यूक्रेन दोनों से संपर्क में भारतजयशंकर ने बताया कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि वह हाल में मॉस्को गए थे, जबकि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात बिश्केक में हुई थी। इसके बाद जयशंकर की कीव यात्रा भी हुई।
विदेश मंत्री ने कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों के साथ विस्तार से बातचीत की गई है। भारत यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ऐसे कौन से विचार और सुझाव विकसित किए जा सकते हैं, जो संघर्ष को कम करने या उसे समाप्त करने में मदद कर सकें।
युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत पर जोरजयशंकर ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध अब पांचवें साल में पहुंच चुका है और भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का रास्ता युद्ध को समाप्त करने की दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे युद्धों में किसी की जीत नहीं होती। हर गुजरते दिन के साथ मौत और तबाही बढ़ती है और इसका असर अन्य देशों पर भी पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चिंता को सार्वजनिक रूप से पहले ही सामने रख चुके हैं। भारत की कोशिश बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। जयशंकर के मुताबिक, सभी देशों को अपनी क्षमता और प्रभाव के अनुसार युद्ध समाप्त करने की कोशिशों का समर्थन करना चाहिए।
पश्चिमी एशिया और इंडो-पैसिफिक पर भी चर्चापोलैंड में हुई बातचीत के दौरान पश्चिमी एशिया और गल्फ क्षेत्र की स्थिति के अलावा इंडो-पैसिफिक में हो रहे घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक साथ कई संघर्षों का सामना कर रही है। इसके अलावा खाद्य पदार्थों, ईंधन और उर्वरक की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
उन्होंने सप्लाई चेन की मजबूती को भी एक अतिरिक्त चिंता बताया। जयशंकर के अनुसार, भारत और पोलैंड राजनीतिक लोकतंत्र, बाजार अर्थव्यवस्था और खुले समाज के रूप में महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग इस समानता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।