ईरान में फिर जंग के बादल, मंत्री बोले- युद्धविराम पर नहीं है भरोसा

भले ही ईरान-इजराइल के बीच सीजफायर की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। दरअसल, दोनों देशों के बीच सीधा संघर्ष भले थमा हो, लेकिन खुफिया और मनोवैज्ञानिक युद्ध अब भी जारी है। यह वही जंग है, जो बिना गोलियों के लड़ी जा रही है, लेकिन मानसिक तौर पर दोनों पक्षों को थकाने वाली है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी विराम दरअसल किसी बड़ी जंग की तैयारी का एक हिस्सा है, और इसी दिशा में ईरान के रक्षा मंत्री का हालिया बयान भी इशारा करता है।

ईरान के रक्षा मंत्री ने एक बार फिर दुनिया को सतर्क कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस्लामी गणराज्य को इजराइल के साथ मौजूदा युद्धविराम पर कतई भरोसा नहीं है। इस आशंका के चलते ईरान ने पहले से ही कई सैन्य परिदृश्य तैयार कर लिए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।

ईरान की सरकारी मीडिया पर जारी बयान में रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह ने सोमवार को तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर से फोन पर बातचीत के दौरान कहा, “ईरान युद्धविराम को लेकर आश्वस्त नहीं है। हमने किसी भी नए दुस्साहस की स्थिति में कई स्तरों पर तैयारियां कर रखी हैं।” उनका यह बयान साफ दर्शाता है कि ईरान अब कोई चूक नहीं करना चाहता।

“हम वार्ता के विरोध में नहीं”

इस बातचीत में नसीरजादेह ने एक मानवीय पक्ष भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध या क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ावा नहीं देना चाहता। “हम नहीं चाहते कि हमारे नागरिक डर के साए में जीएं, लेकिन अगर कोई आक्रामकता दिखाएगा तो हम करारा जवाब देने को मजबूर होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि उनकी सेना हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान बातचीत और शांति प्रक्रिया का विरोधी नहीं है। “हम पर हमला तब हुआ जब हम वार्ता कर रहे थे। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण समय और क्या हो सकता है?” उनके मुताबिक, यह हमला ईरान की मंशा पर सवाल उठाने वालों को जवाब भी है कि “हम समझौते के खिलाफ नहीं, लेकिन धोखे के खिलाफ ज़रूर हैं।”

12 दिनों की तबाही से दहला इलाका

13 जून को इजराइल ने अचानक ही ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। ये हमले इतने तीव्र थे कि शुरुआती चरण में ही कई परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस संघर्ष के दौरान ईरान के सैकड़ों नागरिकों की जान चली गई—यह आंकड़ा हर उस परिवार के दर्द को बयान करता है जो अपनों को खो चुका है। वहीं, ईरान के जवाबी हमलों में 27 इजराइली नागरिक मारे गए और कई सैन्य अड्डों व रिहायशी इलाकों को नुकसान हुआ।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इस तनाव के चलते 15 जून को मस्कत में होने वाली ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता भी रद्द कर दी गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध की आंच केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कूटनीतिक प्रयासों पर भी इसका असर पड़ा है।