मिडिल ईस्ट में जारी तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर अस्थिर बना दिया है। इसी बीच सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब ईरान की ओर से किए गए ड्रोन हमले के बाद दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित एक फ्यूल टैंक में भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया।
मिली जानकारी के मुताबिक यह हमला सोमवार को हुआ, जब एक ड्रोन ने एयरपोर्ट के आसपास मौजूद फ्यूल स्टोरेज क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद वहां रखे ईंधन टैंक में तेज धमाके के साथ आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग की लपटें ऊंची उठने लगीं और काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा। एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास मौजूद लोगों में इस घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हमले की सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां और आपातकालीन सेवाएं तुरंत सक्रिय हो गईं। सिविल डिफेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गईं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू कर दिया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को फैलने से रोक लिया और स्थिति को धीरे-धीरे नियंत्रण में ले आए।
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल हालात पूरी तरह काबू में हैं और राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके की गहन जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमले के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
घटना के बाद एहतियात के तौर पर दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने एयरपोर्ट पर उड़ानों के संचालन को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला लिया। यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अस्थायी रूप से फ्लाइट ऑपरेशंस निलंबित कर दिए गए। इससे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर असर पड़ा।
दुबई मीडिया ऑफिस की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि ड्रोन हमले के कारण एयरपोर्ट के नजदीक मौजूद एक फ्यूल टैंक प्रभावित हुआ था। इसके बाद सिविल डिफेंस की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। साथ ही सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत लागू कर दिया गया, ताकि किसी बड़े नुकसान को टाला जा सके।
आग पर काबू पाने के बाद अब एयरपोर्ट प्रशासन स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा की पूरी तरह जांच करने के बाद ही उड़ानों के संचालन को पूरी तरह बहाल किया जाएगा। फिलहाल एयरपोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते संयुक्त अरब अमीरात पहले भी इस तरह के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर चुका है। पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान कई बार महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। इनमें एयरपोर्ट, समुद्री बंदरगाह और तेल से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आसपास के देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। ऐसे हालात में खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत करना शुरू कर दिया है, ताकि इस तरह के हमलों से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।