क्या चेक बाउंस होने से खराब हो सकता है आपका CIBIL स्कोर? जानें पूरी सच्चाई

अगर आपने कभी किसी को भुगतान के लिए चेक दिया हो और वह बैंक में क्लियर न होकर वापस आ गया हो, तो यह स्थिति काफी असहज हो सकती है। चेक बाउंस होने पर न केवल शर्मिंदगी महसूस होती है, बल्कि बैंक की ओर से पेनल्टी, अतिरिक्त शुल्क और कई बार कानूनी प्रक्रिया का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या चेक बाउंस होने से उनके सिबिल स्कोर पर भी असर पड़ता है। इस बारे में सही जानकारी होना जरूरी है, ताकि घबराने के बजाय आप समझदारी से स्थिति को संभाल सकें।

CIBIL स्कोर क्या होता है और इसकी अहमियत क्यों है?


CIBIL स्कोर तीन अंकों का एक आंकड़ा होता है, जो सामान्यतः 300 से 900 के बीच होता है। यह स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और कर्ज चुकाने की आदतों के आधार पर तैयार किया जाता है। आमतौर पर 750 या उससे अधिक का स्कोर अच्छा माना जाता है। अच्छा सिबिल स्कोर होने पर बैंक और वित्तीय संस्थान आपको भरोसेमंद ग्राहक मानते हैं, जिससे लोन या क्रेडिट कार्ड लेना आसान हो जाता है और ब्याज दर भी अपेक्षाकृत कम मिल सकती है। जब भी बैंक किसी व्यक्ति को लोन या क्रेडिट कार्ड देने का फैसला करते हैं, तो वे भुगतान का रिकॉर्ड, क्रेडिट उपयोग का अनुपात, अलग-अलग प्रकार के लोन और समय पर किस्त चुकाने जैसी कई बातों को ध्यान में रखते हैं।

चेक बाउंस होने की स्थिति कब बनती है?

चेक बाउंस तब होता है जब बैंक किसी कारण से उस चेक को पास नहीं कर पाता। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। उदाहरण के लिए खाते में पर्याप्त राशि न होना, हस्ताक्षर का मेल न खाना, चेक पर गलत या अमान्य तारीख लिखी होना, ओवरराइटिंग, रकम को अंकों और शब्दों में अलग-अलग लिख देना या फिर खाता बंद, फ्रीज या ब्लॉक होना। आम तौर पर इसे एक सामान्य बैंकिंग घटना माना जाता है, लेकिन यदि भुगतान प्राप्त करने वाला व्यक्ति शिकायत दर्ज कराता है तो Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत मामला कानूनी रूप ले सकता है। ऐसी स्थिति में नोटिस, जुर्माना या अदालत की कार्रवाई भी हो सकती है।
क्या चेक बाउंस से सिबिल स्कोर सीधे प्रभावित होता है?

सीधे शब्दों में कहें तो सामान्य परिस्थितियों में चेक बाउंस का सिबिल स्कोर पर सीधा असर नहीं पड़ता। क्रेडिट ब्यूरो जैसे CIBIL या अन्य एजेंसियां मुख्य रूप से लोन, क्रेडिट कार्ड, ईएमआई और बिल भुगतान से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड करती हैं। सेविंग या करंट अकाउंट से जुड़े सामान्य चेक बाउंस की सूचना आमतौर पर क्रेडिट ब्यूरो तक नहीं पहुंचती, इसलिए वह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई नहीं देती।

हालांकि कुछ स्थितियों में इसका अप्रत्यक्ष असर जरूर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए यदि आपने किसी लोन की ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने के लिए चेक दिया और वह बाउंस हो गया, तो उस पेमेंट को मिस्ड या डिफॉल्ट माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और सिबिल स्कोर में 20 से 100 अंक तक की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के चेक बार-बार बाउंस होते हैं, तो बैंक उसे जोखिम भरा ग्राहक मान सकते हैं, जिससे भविष्य में लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलने में कठिनाई हो सकती है।

अगर चेक बाउंस हो जाए तो क्या करना चाहिए?

यदि किसी कारण से आपका चेक बाउंस हो जाता है, तो सबसे पहले अपने खाते में पर्याप्त राशि जमा करें और भुगतान करने वाले व्यक्ति को किसी दूसरे माध्यम से पैसे भेजने की कोशिश करें। इसके साथ ही बैंक से यह भी पता करें कि चेक बाउंस होने का सटीक कारण क्या था और कितना चार्ज लगाया गया है। यदि मामला लोन या ईएमआई से जुड़ा है तो बैंक से अनुरोध किया जा सकता है कि तकनीकी कारणों को ध्यान में रखते हुए इसे नकारात्मक रिपोर्ट के रूप में दर्ज न किया जाए।

भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए यह जरूरी है कि चेक जारी करने से पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें। साथ ही डिजिटल भुगतान जैसे UPI, नेट बैंकिंग या ऑटो-डेबिट का उपयोग करना भी सुरक्षित विकल्प हो सकता है। समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करते रहना भी एक अच्छी आदत है, ताकि अगर किसी तरह की गलती दिखाई दे तो उसे तुरंत सुधारा जा सके। यदि चेक बाउंस के मामले में कानूनी नोटिस मिल जाए, तो बेहतर होगा कि जल्द से जल्द भुगतान करके मामले को सुलझाने की कोशिश की जाए।