ईरान की नजर सऊदी अरब के तेल कुओं पर, इजरायल ने बेरूत में हिजबुल्लाह के 10 ठिकानों को बनाया निशाना

मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं और ईरान, इजरायल तथा अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुका है। कई देशों को अपनी चपेट में ले चुकी इस जंग ने पूरे इलाके में अस्थिरता फैला दी है। लगातार हो रहे हमलों के कारण मौत और तबाही की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि दुनिया भर की नजरें अब इस संकट पर टिकी हुई हैं।

इस तनाव की पृष्ठभूमि में 28 फरवरी को हुई एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। उस दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई, जिसके बाद क्षेत्र में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए। इस घटना के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी और मिसाइलों तथा ड्रोन के जरिए कई हमले किए। इसके चलते खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।

अब यह संघर्ष सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर लेबनान, सऊदी अरब और आसपास के कई देशों तक फैल चुका है। लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों के कारण लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और कई देशों में तेल व गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने अपने महत्वपूर्ण शाइबा तेल क्षेत्र पर होने वाले एक संभावित हमले को नाकाम कर दिया। सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने उस दिशा में बढ़ रहे कई ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये ड्रोन खाली इलाके में इंटरसेप्ट किए गए और उन्हें नष्ट कर दिया गया। शुरुआती रिपोर्टों में ड्रोन की संख्या अलग-अलग बताई गई, लेकिन हाल की जानकारी के अनुसार दो से नौ के बीच ड्रोन को नष्ट किया गया है।

सऊदी अधिकारियों का मानना है कि इन ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ हो सकता है, क्योंकि हाल के दिनों में ईरान और उसके सहयोगी खाड़ी देशों के तेल ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी सऊदी अरब ऐसे हमलों को विफल करता रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती घटनाओं ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

दूसरी ओर इजरायल ने भी लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायली सेना ने राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। बताया जा रहा है कि कम से कम दस अहम लक्ष्यों पर हमले किए गए, जिनमें दक्षिणी उपनगर और समुद्र तट के पास के इलाके शामिल हैं। इन हमलों के बाद कई जगहों पर भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार रामलत अल-बैदा इलाके में हुए एक हमले में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल हो गए। इजरायल का कहना है कि उसके हमले हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, लेकिन लेबनान में नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है। दरअसल ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए थे, जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

इस बीच अमेरिका ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता को बहुत कम समय में खत्म कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बना चुका है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह समाप्त करना बाकी है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो तेहरान के कुछ अहम हिस्सों को निशाना बना सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता। उनका कहना था कि अगर ईरान की बिजली सुविधाओं को नष्ट कर दिया गया तो देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 25 साल लग सकते हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यदि ईरान ने तेल आपूर्ति को बाधित किया या होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की रुकावट पैदा की, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

इन तमाम घटनाओं के बीच मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। दुनिया भर के देश इस संकट को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह जंग किस दिशा में आगे बढ़ती है।