मध्य प्रदेश के भिंड जिले में सामने आए एक हनी ट्रैप मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। पुलिस जांच के दौरान गिरफ्तार की गई मुख्य आरोपी महिला के HIV संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। अधिकारियों को आशंका है कि महिला के संपर्क में आए कई लोग अनजाने में संक्रमण के जोखिम के दायरे में आ गए होंगे। इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और पुलिस मामले की तह तक पहुंचने के लिए व्यापक जांच में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी महिला कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाती थी। उसके निशाने पर विशेष रूप से ऐसे पुरुष होते थे जिन्हें आसानी से ब्लैकमेल किया जा सके। पुलिस का दावा है कि महिला और उसके सहयोगी आपत्तिजनक परिस्थितियां पैदा कर वीडियो रिकॉर्ड करते थे और बाद में उन्हीं वीडियो के आधार पर मोटी रकम की मांग करते थे। मामले के सामने आने के बाद कई संभावित पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब भिंड ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले लगभग 60 वर्षीय किसान ने पुलिस से संपर्क कर ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार एक महिला ने रास्ते में उससे मदद मांगी और घर तक छोड़ने का अनुरोध किया। महिला ने बताया कि उसे चलने-फिरने में परेशानी हो रही है और पैरों में तेज दर्द है। किसान ने मानवता के नाते मदद की, लेकिन बाद में घटनाक्रम अप्रत्याशित दिशा में चला गया।
पुलिस के मुताबिक घर पहुंचने के बाद महिला ने किसान को बातचीत के बहाने अंदर बुलाया। इसी दौरान कथित रूप से ऐसी स्थिति बनाई गई जिसमें किसान को फंसा लिया गया और उसकी जानकारी के बिना वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया। कुछ समय बाद किसान को फोन और अन्य माध्यमों से धमकियां मिलने लगीं। आरोप है कि वीडियो सार्वजनिक करने और झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे बड़ी रकम वसूलने की कोशिश की गई।
जांच में सामने आया है कि रैकेट से जुड़े लोगों ने किसान से सात लाख रुपये की मांग की थी। शुरुआत में सामाजिक बदनामी और कानूनी परेशानियों के डर से किसान ने कुछ राशि भी दे दी। बताया जा रहा है कि उसने करीब पांच हजार रुपये आरोपियों को दिए थे। हालांकि जब दबाव लगातार बढ़ता गया और उससे बड़ी रकम जुटाने के लिए जमीन बेचने जैसी स्थिति बनने लगी, तब उसने पुलिस की मदद लेने का फैसला किया।
किसान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और शुरुआती जांच के बाद मुख्य आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद कराए गए मेडिकल परीक्षण में डॉक्टरों ने पाया कि महिला HIV पॉजिटिव है। जांच में यह भी सामने आया कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के तहत उपचार प्राप्त कर रही थी। इस जानकारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
महिला से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस ने रैकेट से जुड़े तीन अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया। इनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि सुनियोजित गिरोह की गतिविधि हो सकती है, जो लंबे समय से इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पुलिस के अनुसार डिजिटल डिवाइसों में 15 से 16 अलग-अलग पुरुषों से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो और सामग्री बरामद हुई है। इससे संकेत मिलता है कि गिरोह ने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया हो सकता है।
अधिकारियों को आशंका है कि वीडियो में दिखाई देने वाले कुछ व्यक्तियों का आरोपी महिला के साथ शारीरिक संपर्क भी रहा हो सकता है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कम से कम छह से सात ऐसे लोग हो सकते हैं, जो संक्रमण के संभावित जोखिम में आए हों। इसी वजह से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि आवश्यक चिकित्सकीय जांच और परामर्श उपलब्ध कराया जा सके।
भिंड के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने बताया कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद उन्हें मेडिकल जांच और काउंसलिंग के लिए संपर्क किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
पुलिस का मानना है कि शुरुआत में यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली से जुड़ा प्रतीत हो रहा था, लेकिन महिला के HIV संक्रमित होने की जानकारी सामने आने के बाद इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक हो गया है। अब यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़ी चिंता का विषय भी बन गया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों, संभावित पीड़ितों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है।