'ईरान ने सम्मान में होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिका को भेजे तेल से लदे 20 बड़े जहाज', डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

Donald Trump के एक ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिका-इजरायल और Iran के बीच जारी तनाव के बीच एक नया दावा सामने आया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि ईरान ने Strait of Hormuz के जरिए अमेरिका की ओर तेल से भरे बड़े जहाज भेजे हैं, जिसे ट्रंप ने “सम्मान का संकेत” बताया है।

दरअसल, मौजूदा हालात में Strait of Hormuz की रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ गई है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर सख्ती बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक, ईरान अब केवल उन्हीं देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिन्हें वह अपने सहयोगी या मित्र राष्ट्र मानता है। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कि ईरान ने अमेरिका को तेल के जहाज भेजे हैं, काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है।

Donald Trump ने अपने बयान में कहा कि वह इस कदम को पूरी तरह परिभाषित नहीं कर सकते, लेकिन उन्हें लगता है कि यह एक तरह का सम्मान प्रकट करने का तरीका है। उनके अनुसार, ईरान ने अमेरिका के लिए 20 बड़े तेल टैंकर रवाना किए हैं, जो Strait of Hormuz से होकर गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और आने वाले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है।
मीडिया से बातचीत के दौरान, जो उन्होंने अपने विशेष विमान Air Force One में की, ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में ईरान केवल 10 जहाज भेजने पर सहमत था। हालांकि बाद में उसने इस संख्या को बढ़ाकर 20 कर दिया। ट्रंप के मुताबिक, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि ईरान बातचीत और समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

वहीं दूसरी ओर, अमेरिका की रणनीति सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है। Donald Trump ने स्पष्ट किया कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य दबाव भी जारी है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक ओर बातचीत के रास्ते खुले रखे हुए है, वहीं जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने एक बार फिर Barack Obama के कार्यकाल में हुए 2015 के परमाणु समझौते पर निशाना साधा। उन्होंने इस समझौते को अमेरिकी इतिहास की सबसे खराब और गलत डील करार दिया। ट्रंप का कहना है कि अगर उस समझौते को खत्म नहीं किया गया होता, तो आज ईरान परमाणु हथियार हासिल कर चुका होता।

अब Donald Trump एक नए और अधिक सख्त समझौते की वकालत कर रहे हैं, जिसमें ईरान की परमाणु गतिविधियों और सैन्य क्षमताओं पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तनाव किस दिशा में जाता है—क्या यह कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर हालात और अधिक जटिल हो जाएंगे।